अंतरराष्ट्रीय प्रवर्तन की कई सीमाएं हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोई विश्व सरकार नहीं है।
अधिकांश संस्थाएं केवल सुझाव देती हैं, जिन्हें देश नजरअंदाज कर सकते हैं।
राजनीतिक प्रभाव और संसाधनों की कमी भी समस्या है।
सरल अर्थ (Hindi)
कठोर सजा न होने से प्रवर्तन कमजोर है।