न्यायपालिका भारत में मानव अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के संरक्षक हैं।
न्यायालय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई कानून या सरकारी कार्य मानव अधिकारों का उल्लंघन न करे।
जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से आम लोगों को न्याय प्राप्त करना आसान हुआ है।
न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या को विस्तृत करते हुए जीवन के अधिकार में कई अधिकार शामिल किए हैं जैसे सम्मानजनक जीवन, स्वच्छ पर्यावरण आदि।
न्यायपालिका पीड़ितों को मुआवजा भी देती है और जिम्मेदार अधिकारियों को उत्तरदायी बनाती है।
सरल अर्थ (Hindi):
न्यायालय लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है और गलत कानूनों को रोकता है।