यदि आयोग सुओ मोटू मामले में कार्रवाई नहीं करता, तो यह उसकी जिम्मेदारी का उल्लंघन माना जा सकता है।
लेकिन आयोग के पास विवेकाधिकार होता है।
पीड़ित उच्च न्यायालय में जा सकता है।
न्यायालय आयोग को कार्रवाई करने का आदेश दे सकता है।
सरल अर्थ (Hindi):
आयोग कार्रवाई न करे तो कोर्ट से आदेश लिया जा सकता है।