परिचय
कंपनी कानून और न्यायशास्त्र में कई सिद्धांत हैं जो कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी की प्रकृति को समझाने का प्रयास करते हैं। इन सिद्धांतों में से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है Concession Theory (कन्सेशन थ्योरी)।
इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी का अस्तित्व प्राकृतिक रूप से नहीं होता बल्कि राज्य द्वारा दी गई अनुमति के कारण होता है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो कंपनी राज्य की देन (Creature of the State) होती है।
राज्य व्यक्तियों को कंपनी बनाने की अनुमति देता है और उसे कानूनी पहचान प्रदान करता है।
कन्सेशन थ्योरी का अर्थ
Concession Theory के अनुसार कंपनियाँ राज्य की अनुमति से अस्तित्व में आती हैं।
“Concession” का अर्थ है अनुमति या अधिकार जो किसी प्राधिकरण द्वारा दिया जाता है।
इस सिद्धांत के अनुसार राज्य ही वह प्राधिकरण है जो कंपनी को कानूनी पहचान देता है।
यदि राज्य अनुमति न दे तो कंपनी का कानूनी अस्तित्व नहीं होगा।
सिद्धांत का विकास
कन्सेशन थ्योरी का विकास उस समय हुआ जब कंपनियाँ केवल सरकार की विशेष अनुमति से ही बनाई जा सकती थीं।
प्राचीन समय में विश्वविद्यालय, नगरपालिकाएँ और व्यापारिक कंपनियाँ राजकीय चार्टर (Royal Charter) के माध्यम से बनाई जाती थीं।
इसलिए यह विचार विकसित हुआ कि कंपनी का अस्तित्व राज्य की अनुमति पर निर्भर करता है।
कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी से संबंध
कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ है कि कंपनी को एक अलग कानूनी व्यक्ति माना जाता है।
Concession Theory के अनुसार यह कानूनी पहचान राज्य द्वारा दी जाती है।
जब सरकार कंपनी को पंजीकरण की अनुमति देती है, तभी कंपनी कानूनी व्यक्ति बनती है।
Companies Act, 2013 के अंतर्गत
भारत में कंपनियाँ Companies Act, 2013 के अंतर्गत पंजीकृत होती हैं।
जब कंपनी को Certificate of Incorporation मिलता है तब वह एक कानूनी इकाई बन जाती है।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि कंपनी का अस्तित्व राज्य की अनुमति से ही संभव है।
विशेषताएँ
Concession Theory की मुख्य विशेषताएँ हैं:
• कंपनी का अस्तित्व राज्य की अनुमति से होता है
• कंपनी को कानूनी पहचान राज्य देता है
• राज्य कंपनियों को नियंत्रित और विनियमित कर सकता है
• कंपनी का व्यक्तित्व कानून द्वारा प्रदान किया जाता है
महत्व
Concession Theory यह स्पष्ट करती है कि कंपनियों को कानून के अंतर्गत पंजीकृत करना क्यों आवश्यक है।
यह सिद्धांत राज्य की भूमिका को स्पष्ट करता है कि वह कंपनियों को नियंत्रित और विनियमित कर सकता है।
निष्कर्ष
Concession Theory के अनुसार कंपनी राज्य की अनुमति से अस्तित्व में आती है और उसका कानूनी व्यक्तित्व राज्य द्वारा प्रदान किया जाता है।
इस प्रकार यह सिद्धांत कंपनियों के निर्माण और नियंत्रण को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।