नोज़िक का अधिकार सिद्धांत (Entitlement Theory) प्रसिद्ध अमेरिकी दार्शनिक रॉबर्ट नोज़िक (Robert Nozick) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Anarchy, State and Utopia (1974) में प्रस्तुत किया था। यह सिद्धांत जॉन रॉल्स के न्याय सिद्धांत की आलोचना के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
जहाँ रॉल्स का मानना था कि समाज में असमानता को कम करने के लिए सरकार को संपत्ति का पुनर्वितरण करना चाहिए, वहीं नोज़िक का मानना था कि सरकार द्वारा संपत्ति का पुनर्वितरण अन्यायपूर्ण है और यह व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करता है।
नोज़िक के अनुसार न्याय का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोगों के पास समान धन या संसाधन हों। बल्कि न्याय इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति किस प्रकार प्राप्त की गई और कैसे स्थानांतरित की गई।
यदि संपत्ति उचित तरीके से प्राप्त की गई है और उचित तरीके से स्थानांतरित की गई है, तो उस संपत्ति का वितरण न्यायपूर्ण माना जाएगा, चाहे कुछ लोग बहुत अमीर क्यों न हो जाएँ और कुछ लोग गरीब क्यों न रहें।
नोज़िक व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन, श्रम और संपत्ति पर पूर्ण अधिकार होना चाहिए। इसलिए सरकार को आर्थिक गतिविधियों में अत्यधिक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
नोज़िक के सिद्धांत को अधिकार सिद्धांत (Entitlement Theory) कहा जाता है क्योंकि यह इस बात पर केंद्रित है कि क्या व्यक्ति अपने पास मौजूद संपत्ति का वास्तविक अधिकार रखता है।
नोज़िक के अनुसार किसी व्यक्ति को संपत्ति का अधिकार तब प्राप्त होता है जब वह तीन सिद्धांतों को पूरा करता है।
1. संपत्ति प्राप्ति का सिद्धांत (Justice in Acquisition)
यह सिद्धांत बताता है कि व्यक्ति संपत्ति कैसे प्राप्त कर सकता है।
नोज़िक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऐसी संपत्ति प्राप्त करता है जो पहले किसी की नहीं थी और वह इसे दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना प्राप्त करता है, तो वह संपत्ति वैध रूप से उसकी हो जाती है।
उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति खाली जमीन पर खेती करता है या अपनी मेहनत से कोई वस्तु बनाता है, तो वह उस संपत्ति का मालिक बन जाता है।
यह विचार जॉन लॉक के संपत्ति सिद्धांत से प्रभावित है।
2. संपत्ति हस्तांतरण का सिद्धांत (Justice in Transfer)
दूसरा सिद्धांत बताता है कि संपत्ति एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को कैसे स्थानांतरित हो सकती है।
नोज़िक के अनुसार संपत्ति का हस्तांतरण वैध होता है यदि वह स्वेच्छा से किया गया हो, जैसे:
खरीद
बिक्री
उपहार
विरासत
यदि लेन-देन में धोखा, बल या चोरी शामिल नहीं है, तो यह न्यायपूर्ण माना जाएगा।
3. अन्याय सुधार का सिद्धांत (Rectification of Injustice)
तीसरा सिद्धांत उन स्थितियों से संबंधित है जहाँ संपत्ति अनुचित तरीके से प्राप्त की गई हो।
यदि संपत्ति चोरी, धोखाधड़ी या बलपूर्वक प्राप्त की गई हो, तो उस अन्याय को सुधारना आवश्यक है।
सरकार का सीमित हस्तक्षेप केवल ऐसे मामलों में स्वीकार्य है।
नोज़िक का मानना था कि यदि समाज में सभी संपत्ति इन तीन सिद्धांतों के अनुसार प्राप्त और हस्तांतरित हुई है, तो संपत्ति का वितरण स्वतः न्यायपूर्ण होगा।
नोज़िक ने संपत्ति के पुनर्वितरण (Redistribution) का विरोध किया।
उनका तर्क था कि यदि सरकार अमीर लोगों से अधिक कर वसूल कर गरीबों को देती है, तो यह किसी व्यक्ति को दूसरों के लिए काम करने के लिए मजबूर करने जैसा है।
उन्होंने इसे बलपूर्वक श्रम (Forced Labour) के समान बताया।
नोज़िक न्यूनतम राज्य (Minimal State) के समर्थक थे।
उनके अनुसार राज्य का कार्य सीमित होना चाहिए:
हिंसा से सुरक्षा
चोरी से सुरक्षा
अनुबंधों का पालन
न्याय का प्रशासन
सरकार को आर्थिक समानता स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
नोज़िक का सिद्धांत स्वतंत्रतावादी न्याय सिद्धांत (Libertarian Theory) का प्रतिनिधित्व करता है।
इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकार सबसे महत्वपूर्ण हैं।
हालाँकि इस सिद्धांत की आलोचना भी की गई है।
आलोचकों का कहना है कि नोज़िक का सिद्धांत सामाजिक असमानताओं को अनदेखा करता है। कई लोग गरीबी या भेदभाव जैसी परिस्थितियों के कारण पीछे रह जाते हैं।
फिर भी नोज़िक का अधिकार सिद्धांत आधुनिक राजनीतिक दर्शन में अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांतों में से एक है।
यह सिद्धांत व्यक्तिगत अधिकारों, संपत्ति अधिकारों और सीमित सरकार के महत्व को उजागर करता है।