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Explain Common Law system.

कॉमन लॉ प्रणाली (Common Law System) दुनिया की प्रमुख कानूनी प्रणालियों में से एक है। इसकी उत्पत्ति इंग्लैंड में हुई थी और बाद में ब्रिटिश शासन के माध्यम से यह कई देशों में फैल गई।

आज यह प्रणाली ब्रिटेन, भारत, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई कॉमनवेल्थ देशों में अपनाई जाती है।

कॉमन लॉ प्रणाली मुख्य रूप से न्यायालयों के निर्णय और नज़ीर (precedent) पर आधारित होती है।

“कॉमन लॉ” का अर्थ है ऐसा कानून जो पूरे देश में समान रूप से लागू होता है और जो समय के साथ न्यायालयों के निर्णयों से विकसित हुआ है।

कॉमन लॉ प्रणाली का विकास इंग्लैंड में 1066 के नॉर्मन विजय के बाद हुआ।

उस समय इंग्लैंड के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानीय कानून और परंपराएँ थीं।

बाद में शाही न्यायालयों ने पूरे देश में एक समान नियम लागू किए और धीरे-धीरे यह कॉमन लॉ प्रणाली बन गई।

कॉमन लॉ प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है नज़ीर का सिद्धांत (Doctrine of Precedent)।

इसे Stare Decisis भी कहा जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार उच्च न्यायालयों के निर्णय निचली अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं।

उदाहरण के लिए यदि सर्वोच्च न्यायालय किसी कानूनी प्रश्न पर निर्णय देता है, तो निचली अदालतों को उसी सिद्धांत का पालन करना होगा।

इससे कानून में स्थिरता और निश्चितता बनी रहती है।

कॉमन लॉ प्रणाली में न्यायाधीशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

न्यायाधीश केवल कानून लागू नहीं करते बल्कि उसकी व्याख्या भी करते हैं और कई बार नए सिद्धांत भी विकसित करते हैं।

इसी कारण कॉमन लॉ को न्यायाधीश द्वारा निर्मित कानून (Judge-made law) भी कहा जाता है।

इस प्रणाली में केस लॉ (Case Law) का बहुत महत्व होता है।

केस लॉ का अर्थ है पूर्व न्यायिक निर्णयों से विकसित कानूनी सिद्धांत।

कॉमन लॉ प्रणाली में न्यायिक प्रक्रिया विरोधी प्रणाली (Adversarial System) पर आधारित होती है।

इसमें दो पक्ष अपने-अपने तर्क न्यायालय के सामने प्रस्तुत करते हैं और न्यायाधीश निष्पक्ष निर्णय देते हैं।

भारत में भी कॉमन लॉ प्रणाली अपनाई गई है क्योंकि भारत लंबे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा।

भारत में न्यायिक नज़ीर, न्यायिक समीक्षा और विधियों की व्याख्या जैसे सिद्धांत कॉमन लॉ पर आधारित हैं।