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Discuss rule of law in Maneka Gandhi case.

मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) भारतीय संवैधानिक कानून का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है।

इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या का विस्तार किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मेनका गांधी को पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अंतर्गत पासपोर्ट जारी किया गया था।

बाद में सरकार ने सार्वजनिक हित का हवाला देते हुए उनका पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया।

सरकार ने स्पष्ट कारण नहीं बताए।

मेनका गांधी ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।

न्यायालय का निर्णय

न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत “कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया” न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत होनी चाहिए।

सरकार मनमाने तरीके से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित नहीं कर सकती।

महत्व

इस निर्णय ने विधि के शासन (Rule of Law) के सिद्धांत को मजबूत किया।

न्यायालय ने कहा कि राज्य की सभी कार्रवाइयाँ न्यायपूर्ण और निष्पक्ष होनी चाहिए।