न्यायशास्त्र (Jurisprudence) विधि का दर्शन है। यह कानून के पीछे छिपे सिद्धांतों और विचारों का अध्ययन करता है। जहाँ कंपनी कानून, अनुबंध कानून या दंड कानून विशेष धाराओं का अध्ययन करते हैं, वहीं न्यायशास्त्र यह पूछता है कि कानून क्यों बनाया गया, कानून का उद्देश्य क्या है, न्याय क्या है, अधिकार और कर्तव्य कैसे उत्पन्न होते हैं।
एल.एल.बी. तृतीय सेमेस्टर में कंपनी कानून को समझने के लिए न्यायशास्त्र की समझ बहुत आवश्यक है। यदि विद्यार्थी केवल धारा पढ़ेगा पर उसके पीछे का सिद्धांत नहीं समझेगा तो उसकी समझ अधूरी रहेगी।
न्यायशास्त्र की प्रकृति (Nature) का अर्थ है इसकी मूल विशेषताएँ।
न्यायशास्त्र का क्षेत्र (Scope) का अर्थ है वह सीमाएँ और विषय जिनका अध्ययन यह करता है।
न्यायशास्त्र का अर्थ
“Jurisprudence” शब्द लैटिन भाषा से आया है।
“Juris” का अर्थ है कानून
“Prudentia” का अर्थ है ज्ञान
अर्थात न्यायशास्त्र का अर्थ है “कानून का ज्ञान”।
परंतु यह केवल कानून का ज्ञान नहीं है बल्कि कानून के बारे में ज्ञान है। यह निम्न बातों का अध्ययन करता है:
• कानून की उत्पत्ति
• कानून का स्वरूप
• कानून का उद्देश्य
• अधिकार और कर्तव्य
• कानून और नैतिकता का संबंध
इसलिए न्यायशास्त्र सैद्धांतिक और दार्शनिक विषय है।
न्यायशास्त्र की प्रकृति
1. यह सैद्धांतिक अध्ययन है
न्यायशास्त्र प्रतिदिन के मुकदमों का अध्ययन नहीं करता। यह सिद्धांतों का अध्ययन करता है। उदाहरण के लिए, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(20) कंपनी की परिभाषा देती है। न्यायशास्त्र पूछता है कि कंपनी को अलग विधिक व्यक्तित्व क्यों दिया गया।
2. यह वैज्ञानिक अध्ययन है
यह कानून को व्यवस्थित और तार्किक रूप में समझाता है। जैसे अधिकार, कर्तव्य, दायित्व, स्वामित्व आदि।
3. यह दार्शनिक है
यह नैतिकता और न्याय की चर्चा करता है।
क्या हर कानून न्यायपूर्ण होता है?
क्या अन्यायपूर्ण कानून का पालन करना चाहिए?
कंपनी अधिनियम की धारा 241 अल्पसंख्यक शेयरधारकों की सुरक्षा देती है। यह न्याय के सिद्धांत पर आधारित है।
4. यह विश्लेषणात्मक है
यह कानून को जैसा है वैसा समझाता है। यह अच्छा या बुरा का निर्णय नहीं करता बल्कि अवधारणाओं को स्पष्ट करता है।
5. यह मानक आधारित है
यह बताता है कि कानून कैसा होना चाहिए।
धारा 135 के अंतर्गत CSR सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।
न्यायशास्त्र का क्षेत्र
1. विधिक अवधारणाओं का अध्ययन
अधिकार
कर्तव्य
दायित्व
स्वामित्व
व्यक्तित्व
कंपनी कानून में शेयरधारकों के अधिकार और निदेशकों के कर्तव्य होते हैं।
2. कानून के स्रोत
विधायन
न्यायालय निर्णय
रिवाज
कंपनी अधिनियम 2013 एक विधायन है।
3. विधिक प्रणाली का अध्ययन
भारत में कॉमन लॉ प्रणाली है।
4. कानून और समाज का संबंध
कानून समाज को नियंत्रित करता है।
धोखाधड़ी और कुप्रबंधन से संबंधित प्रावधान समाज की रक्षा करते हैं।
5. न्याय का अध्ययन
वितरणात्मक न्याय
सुधारात्मक न्याय
सामाजिक न्याय
CSR सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है।
6. अधिकार और कर्तव्य
हर अधिकार के साथ कर्तव्य जुड़ा होता है।
7. विधिक व्यक्तित्व
कंपनी अपने सदस्यों से अलग होती है।
यह सिद्धांत Salomon v. Salomon केस में स्थापित हुआ।
8. दायित्व
नागरिक दायित्व
आपराधिक दायित्व
9. व्याख्या
शाब्दिक नियम
स्वर्णिम नियम
दोष नियम
कंपनी कानून में महत्व
अलग विधिक व्यक्तित्व
सीमित दायित्व
अल्पसंख्यक संरक्षण
CSR
ये सभी न्यायशास्त्रीय सिद्धांतों पर आधारित हैं।
निष्कर्ष
न्यायशास्त्र कानून की आत्मा है।
यह कानून की नींव है।
इसके बिना विधि का अध्ययन अधूरा है।