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Theories of Corporate Personality

कॉरपोरेट व्यक्तित्व कंपनी कानून का एक मूल सिद्धांत है। कानून कंपनी को उसके सदस्यों से अलग एक स्वतंत्र कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है। कंपनियों अधिनियम, 2013 की पूरी संरचना इसी सिद्धांत पर आधारित है।

कॉरपोरेट व्यक्तित्व का अर्थ है कि कंपनी स्वयं संपत्ति रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, मुकदमा कर सकती है और उस पर मुकदमा किया जा सकता है।

विभिन्न विधि विद्वानों ने इसे समझाने के लिए अलग-अलग सिद्धांत दिए हैं।

मुख्य सिद्धांत हैं:

काल्पनिक सिद्धांत (Fiction Theory)

राज्य अनुमति सिद्धांत (Concession Theory)

वास्तविक सिद्धांत (Realist Theory)

ब्रैकेट सिद्धांत (Bracket Theory)

उद्देश्य सिद्धांत (Purpose Theory)

1. काल्पनिक सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति है। वह वास्तव में अस्तित्व में नहीं है। कानून उसे अस्तित्व देता है।

धारा 7 के अंतर्गत पंजीकरण के बाद ही कंपनी अस्तित्व में आती है।

2. राज्य अनुमति सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी का अस्तित्व राज्य की अनुमति पर निर्भर है।

भारत में बिना पंजीकरण कंपनी कानूनी व्यक्ति नहीं बन सकती।

3. वास्तविक सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी वास्तव में एक अलग इकाई है।

Salomon केस में न्यायालय ने कंपनी को अलग कानूनी इकाई माना।

4. ब्रैकेट सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी केवल एक नाम है जिसके अंदर सदस्य आते हैं।

5. उद्देश्य सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी का अस्तित्व उसके उद्देश्य तक सीमित है।

उदाहरण: धारा 8 कंपनी।

महत्व:

सीमित दायित्व

स्थायी उत्तराधिकार

अलग संपत्ति

निष्कर्ष:

कंपनी कानून में वास्तविक सिद्धांत और काल्पनिक सिद्धांत दोनों का मिश्रण स्वीकार किया जाता है।