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Can animals be legal persons? Discuss.

परिचय

कानून में कानूनी व्यक्तित्व (Legal Personality) की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है।

कानूनी व्यक्ति वह होता है जिसे कानून अधिकार और कर्तव्य रखने की क्षमता प्रदान करता है।

सामान्य रूप से मनुष्य को प्राकृतिक व्यक्ति माना जाता है।

लेकिन कानून कुछ गैर-मानव इकाइयों को भी कानूनी व्यक्ति मानता है, जैसे:

• कंपनी
• निगम
• संस्थान

उदाहरण के लिए, कंपनी मानव नहीं होती, लेकिन Companies Act, 2013 के अंतर्गत उसे कानूनी व्यक्ति माना जाता है।

इसका मतलब है कि कंपनी:

• संपत्ति रख सकती है
• अनुबंध कर सकती है
• मुकदमा कर सकती है
• उस पर मुकदमा किया जा सकता है

इससे यह सिद्ध होता है कि कानून आवश्यकता के अनुसार गैर-मानव इकाइयों को भी कानूनी व्यक्तित्व दे सकता है।

इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है:

क्या जानवरों को भी कानूनी व्यक्ति माना जा सकता है?

हाल के वर्षों में कई न्यायालयों ने इस विषय पर विचार किया है।

कानूनी व्यक्ति का अर्थ

कानूनी व्यक्ति वह इकाई है जिसे कानून अधिकार और कर्तव्य रखने की क्षमता देता है।

कानूनी व्यक्तियों के दो प्रकार होते हैं:

प्राकृतिक व्यक्ति

कृत्रिम व्यक्ति

प्राकृतिक व्यक्ति मानव होते हैं।

कृत्रिम व्यक्ति वे इकाइयाँ होती हैं जिन्हें कानून बनाता है, जैसे कंपनी या संस्था।

Companies Act, 2013 की धारा 9 के अनुसार कंपनी पंजीकरण के बाद एक Body Corporate बन जाती है।

इसका अर्थ है कि कंपनी एक अलग कानूनी इकाई बन जाती है।

जानवरों के कानूनी व्यक्तित्व की अवधारणा

परंपरागत रूप से कानून में जानवरों को केवल संपत्ति माना जाता था।

उनके पास कोई स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं थे।

लेकिन आधुनिक समय में यह सोच बदल रही है।

अब कई विधि विशेषज्ञ मानते हैं कि जानवरों को भी कुछ कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए क्योंकि वे जीवित प्राणी हैं और दर्द महसूस कर सकते हैं।

इसलिए कुछ न्यायालयों ने जानवरों को सीमित उद्देश्य के लिए कानूनी इकाई के रूप में मान्यता दी है।

पशु अधिकारों का विकास

भारत में पशुओं की सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए गए हैं।

जैसे:

Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960

यह कानून पशुओं के साथ क्रूरता को रोकने के लिए बनाया गया है।

भारतीय संविधान भी पशुओं के प्रति करुणा को प्रोत्साहित करता है।

अनुच्छेद 51A(g) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखे।

न्यायालयों द्वारा मान्यता

भारतीय न्यायालयों ने कुछ मामलों में पशुओं को कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता दी है।

Animal Welfare Board of India v. A. Nagaraja (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशुओं का अपना मूल्य होता है और उनकी रक्षा आवश्यक है।

Narayan Dutt Bhatt v. Union of India (2020) मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि पशुओं को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें कानूनी व्यक्ति के रूप में माना जा सकता है।

जानवरों को कानूनी व्यक्ति मानने के कारण

जानवरों को कानूनी व्यक्ति मानने के कई कारण हैं।

पहला, जानवर जीवित प्राणी हैं और दर्द महसूस कर सकते हैं।

दूसरा, वे पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तीसरा, इससे पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकने में मदद मिल सकती है।

सीमाएँ

फिर भी जानवर पूरी तरह से कानूनी व्यक्ति नहीं बन सकते।

वे:

• अनुबंध नहीं कर सकते
• अदालत में स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते
• स्वयं संपत्ति का प्रबंधन नहीं कर सकते

इसलिए उनके लिए मनुष्य को संरक्षक (guardian) के रूप में कार्य करना पड़ता है।

निष्कर्ष

यह विषय अभी विकसित हो रहा है।

परंपरागत रूप से जानवरों को संपत्ति माना जाता था।

लेकिन आधुनिक न्यायालय पशुओं की सुरक्षा के लिए उन्हें सीमित रूप में कानूनी व्यक्ति मानने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

यह आधुनिक कानून में न्याय और करुणा की बढ़ती समझ को दर्शाता है।