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Define Grundnorm.

ग्रुंडनॉर्म (Grundnorm) की परिभाषा

ग्रुंडनॉर्म (Grundnorm) शब्द हांस केल्सन द्वारा दिया गया है। यह शब्द जर्मन भाषा से लिया गया है। “Grund” का अर्थ है “मूल” या “आधार” और “Norm” का अर्थ है “नियम”। इसलिए ग्रुंडनॉर्म का अर्थ है “मूल नियम” या “आधारभूत मानदंड”।

केल्सन के अनुसार, प्रत्येक विधिक व्यवस्था का एक अंतिम आधार होता है, जिससे उसकी पूरी वैधता (Validity) उत्पन्न होती है। वही अंतिम आधार ग्रुंडनॉर्म कहलाता है।

ग्रुंडनॉर्म कोई लिखित कानून नहीं है। यह संविधान में नहीं लिखा होता। यह संसद द्वारा पारित नहीं किया जाता। यह एक अनुमानित (Presupposed) नियम है। इसे हम मान लेते हैं ताकि पूरी विधिक व्यवस्था को वैध माना जा सके।

ग्रुंडनॉर्म की आवश्यकता क्यों?

केल्सन ने यह प्रश्न उठाया कि जब हम कहते हैं कि कोई कानून वैध है, तो वह क्यों वैध है?

उदाहरण:

निदेशक को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166 का पालन करना चाहिए।

कंपनी अधिनियम वैध है क्योंकि संसद ने इसे बनाया।

संसद को कानून बनाने की शक्ति संविधान से मिली है।

संविधान क्यों वैध है?

इस अंतिम प्रश्न का उत्तर ग्रुंडनॉर्म देता है।

हम यह मान लेते हैं कि “संविधान का पालन किया जाना चाहिए।” यही मूल मानदंड (Grundnorm) है।

विधिक श्रेणी (Hierarchy of Norms)

केल्सन ने विधि को एक पिरामिड के रूप में समझाया। इस पिरामिड के सबसे ऊपर ग्रुंडनॉर्म होता है।

संरचना इस प्रकार है:

ग्रुंडनॉर्म (मूल मानदंड)

संविधान

संसद द्वारा बनाए गए कानून (जैसे कंपनी अधिनियम, 2013)

नियम और विनियम

व्यक्तिगत आदेश और निर्णय

यदि कोई निम्न स्तर का नियम उच्च स्तर के नियम के विपरीत है, तो वह अमान्य हो जाएगा।

उदाहरण के लिए, यदि कंपनी अधिनियम का कोई प्रावधान संविधान के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है, तो अनुच्छेद 13 के अंतर्गत वह शून्य घोषित किया जा सकता है।

ग्रुंडनॉर्म का स्वरूप

यह काल्पनिक है।

यह अनुमानित है।

यह सर्वोच्च मानदंड है।

यह संविधान को वैधता देता है।

यह पूरी विधिक व्यवस्था का आधार है।

ग्रुंडनॉर्म नैतिक नियम नहीं है। यह यह नहीं कहता कि संविधान न्यायपूर्ण है। यह केवल यह मानता है कि संविधान का पालन किया जाना चाहिए।

कंपनी अधिनियम में प्रयोग

कंपनी अधिनियम, 2013 संसद द्वारा बनाया गया है। संसद को यह शक्ति संविधान से मिली है। संविधान की वैधता ग्रुंडनॉर्म से आती है।

इस प्रकार:

Grundnorm → संविधान → कंपनी अधिनियम → नियम → आदेश

इस श्रेणी के माध्यम से कंपनी कानून की वैधता को समझा जा सकता है।

महत्व

विधिक वैधता की व्याख्या करता है।

संविधान की सर्वोच्चता स्थापित करता है।

न्यायिक समीक्षा को आधार देता है।

विधिक प्रणाली को एकता प्रदान करता है।

तार्किक आधार प्रदान करता है।

आलोचना

ग्रुंडनॉर्म काल्पनिक है।

इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

यह सामाजिक तत्वों की अनदेखी करता है।

यह अत्यधिक सैद्धांतिक है।

निष्कर्ष

ग्रुंडनॉर्म वह मूल मानदंड है जिससे पूरी विधिक व्यवस्था की वैधता उत्पन्न होती है। यह लिखा हुआ नियम नहीं है, बल्कि एक तार्किक अनुमान है। भारत में संविधान सर्वोच्च है, और कंपनी अधिनियम, 2013 उसकी शक्ति से वैध है।