राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएँ हैं जो इसकी प्रभावशीलता को कम करती हैं।
सबसे बड़ी सीमा यह है कि इसके आदेश बाध्यकारी नहीं होते। सरकार इन्हें मान भी सकती है और अस्वीकार भी कर सकती है।
इसके पास लागू करने की शक्ति नहीं है। यह सीधे अपराधियों को दंड नहीं दे सकता।
यह निजी व्यक्तियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता जब तक सरकारी अधिकारी शामिल न हों।
मामलों में देरी भी एक बड़ी समस्या है।
यह जांच के लिए पुलिस पर निर्भर रहता है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
इस कारण NHRC को एक सलाह देने वाली संस्था माना जाता है।
सरल अर्थ (Hindi):
NHRC के पास शक्ति कम है, इसलिए इसका प्रभाव सीमित है।