परिचय
कानून में अधिकार (Rights) और कर्तव्य (Duties) एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। कोई भी अधिकार अकेला नहीं होता। जब किसी व्यक्ति को कोई अधिकार दिया जाता है, तो किसी अन्य व्यक्ति पर उस अधिकार का सम्मान करने का कर्तव्य भी होता है।
इसी कारण से अधिकार और कर्तव्य को अक्सर एक ही सिक्के के दो पहलू कहा जाता है।
सरल शब्दों में:
अधिकार (Right) का अर्थ है वह कानूनी दावा जिसे कोई व्यक्ति मांग सकता है।
कर्तव्य (Duty) का अर्थ है वह जिम्मेदारी जिसे किसी व्यक्ति को निभाना आवश्यक होता है।
कानून व्यक्तियों को अधिकार इसलिए देता है ताकि वे समाज में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। साथ ही कानून दूसरों पर कर्तव्य भी लगाता है ताकि इन अधिकारों की रक्षा की जा सके।
कंपनी कानून और सामान्य न्यायशास्त्र में अधिकार और कर्तव्य का संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि कर्तव्य न हों तो अधिकार निरर्थक हो जाएंगे और यदि अधिकार न हों तो कर्तव्य का कोई उद्देश्य नहीं रहेगा।
इसलिए कानून एक संतुलित व्यवस्था बनाता है जिसमें अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ काम करते हैं।
अधिकार का अर्थ
अधिकार वह कानूनी शक्ति है जो किसी व्यक्ति को कानून द्वारा दी जाती है।
इसके माध्यम से व्यक्ति किसी चीज़ की मांग कर सकता है या दूसरों से एक विशेष प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी कंपनी का शेयरधारक कंपनी की बैठक में मतदान करने का अधिकार रखता है। यह अधिकार कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा मान्यता प्राप्त है।
अधिकार व्यक्तियों के हितों की रक्षा करने के लिए बनाए जाते हैं।
कुछ सामान्य अधिकार इस प्रकार हैं:
कंपनी की बैठक में मतदान का अधिकार
लाभांश प्राप्त करने का अधिकार
कंपनी के दस्तावेज़ों का निरीक्षण करने का अधिकार
अधिकारों के उल्लंघन पर मुकदमा दायर करने का अधिकार
इस प्रकार अधिकार वह कानूनी शक्ति है जो व्यक्ति को अपने हितों की रक्षा करने के लिए दी जाती है।
कर्तव्य का अर्थ
कर्तव्य वह कानूनी जिम्मेदारी है जिसे किसी व्यक्ति को निभाना आवश्यक होता है।
जब कानून किसी व्यक्ति को किसी विशेष प्रकार से कार्य करने के लिए बाध्य करता है, तब वह कर्तव्य कहलाता है।
उदाहरण के लिए, कंपनी के निदेशकों का कर्तव्य होता है कि वे कंपनी के हित में ईमानदारी से कार्य करें।
कर्तव्य यह सुनिश्चित करते हैं कि दूसरों के अधिकारों का सम्मान किया जाए।
कर्तव्य के कुछ उदाहरण हैं:
निदेशक ईमानदारी से कार्य करें
कंपनी सही रिकॉर्ड बनाए रखे
शेयरधारक कंपनी के नियमों का पालन करें
अधिकारी कानूनी नियमों का पालन करें
इस प्रकार कर्तव्य कानून द्वारा लगाया गया दायित्व है।
अधिकार और कर्तव्य का संबंध
अधिकार और कर्तव्य का संबंध बहुत गहरा है।
वास्तव में हर अधिकार के साथ एक कर्तव्य जुड़ा होता है।
इसका अर्थ है कि जब किसी व्यक्ति को अधिकार मिलता है तो किसी दूसरे व्यक्ति पर कर्तव्य बनता है।
उदाहरण:
यदि किसी शेयरधारक को लाभांश प्राप्त करने का अधिकार है, तो कंपनी का कर्तव्य है कि वह कानून के अनुसार लाभांश दे।
इसी प्रकार:
यदि किसी शेयरधारक को मतदान का अधिकार है, तो कंपनी का कर्तव्य है कि वह उसे मतदान करने का अवसर दे।
इस प्रकार अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं।
कंपनी कानून में अधिकार और कर्तव्य
कंपनी कानून में कई पक्ष होते हैं:
शेयरधारक
निदेशक
कंपनी
लेनदार
कर्मचारी
इन सभी के अपने-अपने अधिकार और कर्तव्य होते हैं।
शेयरधारकों के अधिकार
सामान्य सभा में मतदान का अधिकार
लाभांश प्राप्त करने का अधिकार
कंपनी के रिकॉर्ड देखने का अधिकार
शेयर हस्तांतरण का अधिकार
शेयरधारकों के कर्तव्य
कंपनी के नियमों का पालन करना
अवैतनिक शेयर पूंजी का भुगतान करना
कंपनी के निर्णयों का सम्मान करना
इस प्रकार अधिकारों के साथ कर्तव्य भी जुड़े होते हैं।
निदेशकों के अधिकार और कर्तव्य
निदेशक कंपनी का प्रबंधन करते हैं।
उनके कुछ अधिकार होते हैं जैसे:
कंपनी का संचालन करना
व्यावसायिक निर्णय लेना
कंपनी का प्रतिनिधित्व करना
लेकिन उनके महत्वपूर्ण कर्तव्य भी होते हैं।
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 166 के अनुसार निदेशकों को:
सद्भावना से कार्य करना चाहिए
कंपनी के हित में निर्णय लेना चाहिए
हितों के टकराव से बचना चाहिए
सावधानी और कौशल का प्रयोग करना चाहिए
निष्कर्ष
अधिकार और कर्तव्य का संबंध कानून का मूल सिद्धांत है।
दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं।
कंपनी अधिनियम 2013 में शेयरधारकों, निदेशकों और कंपनी के अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं।
इनका उद्देश्य कंपनी में न्याय, संतुलन और सुशासन बनाए रखना है।