समाजवादी कानून (Socialist Law) उस कानूनी प्रणाली को कहा जाता है जो समाजवादी राज्यों में विकसित हुई और जिसका उद्देश्य समाजवादी विचारधारा को समर्थन देना था।
यह प्रणाली मुख्य रूप से मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा से प्रभावित देशों में विकसित हुई, जैसे सोवियत संघ, चीन, क्यूबा और पूर्वी यूरोप के कई देश।
समाजवादी कानून का उद्देश्य श्रमिक वर्ग के हितों की रक्षा करना और आर्थिक समानता को बढ़ावा देना था।
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के अनुसार पूंजीवादी समाजों में कानून मुख्य रूप से निजी संपत्ति और अमीर वर्ग के हितों की रक्षा करता है।
इसलिए समाजवादी सिद्धांत के अनुसार कानून का उपयोग वर्ग शोषण को समाप्त करने और एक वर्गहीन समाज बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
समाजवादी कानून की मुख्य विशेषता है सामूहिक स्वामित्व (Collective Ownership)।
इस प्रणाली में प्राकृतिक संसाधनों और प्रमुख उद्योगों का स्वामित्व राज्य या समाज के पास होता है।
समाजवादी कानून में राज्य की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
राज्य आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है और संसाधनों के वितरण को नियंत्रित करता है।
इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आर्थिक असमानता को कम करना है।
इसलिए समाजवादी कानून सामाजिक कल्याण और समानता पर जोर देता है।
समाजवादी प्रणाली में सामूहिक हित को व्यक्तिगत हित से अधिक महत्व दिया जाता है।
इसका अर्थ है कि यदि व्यक्तिगत अधिकार समाज के सामूहिक हितों के विरुद्ध हों तो उन्हें सीमित किया जा सकता है।
समाजवादी देशों में न्यायालय अक्सर राजनीतिक प्रणाली से जुड़े होते हैं।
इस कारण आलोचकों का कहना है कि इस प्रणाली में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।
फिर भी समर्थकों का मानना है कि समाजवादी कानून सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता को बढ़ावा देता है।
आज कई समाजवादी देशों ने आर्थिक सुधार किए हैं और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था के कुछ तत्व अपनाए हैं।
फिर भी समाजवादी कानून का प्रभाव कई देशों की कानूनी प्रणाली में दिखाई देता है।