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Rawls Theory of Justice

परिचय

जॉन रॉल्स (John Rawls) आधुनिक युग के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक A Theory of Justice (1971) में न्याय का एक नया सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनका सिद्धांत “Justice as Fairness” अर्थात “न्याय के रूप में निष्पक्षता” के नाम से जाना जाता है।

रॉल्स का मुख्य प्रश्न था — एक न्यायपूर्ण समाज कैसा होना चाहिए?

रॉल्स के अनुसार न्याय का अर्थ है निष्पक्षता। समाज तभी न्यायपूर्ण कहा जाएगा जब उसके नियम सभी लोगों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करें, विशेषकर समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के साथ।

उन्होंने कहा कि न्याय धन, शक्ति, जाति, लिंग या सामाजिक स्थिति पर आधारित नहीं होना चाहिए। न्याय का आधार समानता और निष्पक्षता होना चाहिए।

रॉल्स का सिद्धांत न्यायशास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि कानून और संस्थाएँ किस प्रकार बनाई जानी चाहिए। कंपनी अधिनियम, 2013 के कई प्रावधान भी इसी निष्पक्षता और कमजोर वर्ग की सुरक्षा के सिद्धांत को दर्शाते हैं।

न्याय के रूप में निष्पक्षता (Justice as Fairness)

रॉल्स ने कहा कि न्याय का सही अर्थ है निष्पक्षता। लेकिन निष्पक्षता तभी संभव है जब नियम बनाने वाला व्यक्ति अपने निजी हित से प्रभावित न हो।

इसलिए उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति बनाई जिसे कहा जाता है:

मूल स्थिति (Original Position)

अज्ञान का आवरण (Veil of Ignorance)

मूल स्थिति (Original Position)

रॉल्स ने कल्पना की कि समाज के नियम तय करने से पहले सभी लोग एक साथ बैठकर न्याय के सिद्धांत तय करते हैं। यह स्थिति “मूल स्थिति” कहलाती है।

इस स्थिति में सभी लोग बुद्धिमान और तर्कशील हैं। वे अपने हितों की रक्षा करना चाहते हैं।

लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण शर्त है — उन्हें यह नहीं पता कि भविष्य में समाज में उनका स्थान क्या होगा।

अज्ञान का आवरण (Veil of Ignorance)

रॉल्स का सबसे महत्वपूर्ण विचार है “अज्ञान का आवरण”।

इसका अर्थ है कि नियम बनाते समय कोई भी व्यक्ति यह नहीं जानता:

वह अमीर होगा या गरीब

वह पुरुष होगा या महिला

वह बहुसंख्यक होगा या अल्पसंख्यक

वह मालिक होगा या कर्मचारी

वह निदेशक होगा या छोटा शेयरधारक

जब व्यक्ति अपने भविष्य की स्थिति नहीं जानता, तो वह निष्पक्ष नियम बनाएगा। क्योंकि हो सकता है कि वह स्वयं सबसे कमजोर स्थिति में पहुँच जाए।

यही अज्ञान निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।

रॉल्स के दो न्याय सिद्धांत

रॉल्स ने कहा कि मूल स्थिति में लोग दो सिद्धांत चुनेंगे।

पहला सिद्धांत – समान स्वतंत्रता का सिद्धांत (Equal Liberty Principle)

प्रत्येक व्यक्ति को समान मूलभूत स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

इनमें शामिल हैं:

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

धर्म की स्वतंत्रता

कानून के समक्ष समानता

मतदान का अधिकार

व्यक्तिगत स्वतंत्रता

इन अधिकारों को आर्थिक लाभ के लिए छीना नहीं जा सकता।

कंपनी कानून में महत्व:

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 47 शेयरधारकों को समान मतदान अधिकार देती है।
यह समान स्वतंत्रता के सिद्धांत को दर्शाती है।

दूसरा सिद्धांत – अंतर सिद्धांत (Difference Principle)

यह सिद्धांत कहता है कि समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता स्वीकार की जा सकती है, लेकिन दो शर्तों पर:

वह असमानता समाज के सबसे कमजोर वर्ग के हित में हो।

सभी को समान अवसर उपलब्ध हों।

रॉल्स पूर्ण समानता के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने असमानता को स्वीकार किया, लेकिन केवल तभी जब वह कमजोर वर्ग की स्थिति सुधारती हो।

उदाहरण:

यदि कंपनी के निदेशक कर्मचारियों से अधिक वेतन लेते हैं, तो यह तभी उचित है जब कंपनी की वृद्धि से कर्मचारियों और समाज को भी लाभ हो।

कंपनी अधिनियम, 2013 में रॉल्स का प्रभाव

हालाँकि रॉल्स का नाम सीधे कंपनी अधिनियम में नहीं है, लेकिन उनके सिद्धांत की भावना दिखाई देती है।

1. अल्पसंख्यक शेयरधारकों की सुरक्षा (धारा 241)

यदि बहुसंख्यक शेयरधारक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते हैं, तो वे न्यायालय जा सकते हैं।

यह अंतर सिद्धांत को दर्शाता है।

2. क्लास एक्शन (धारा 245)

छोटे निवेशक मिलकर कंपनी के विरुद्ध कार्यवाही कर सकते हैं।

यह कमजोर वर्ग की रक्षा करता है।

3. कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (धारा 135)

बड़ी कंपनियों को सामाजिक कल्याण पर खर्च करना अनिवार्य है।

यह रॉल्स के विचार को दर्शाता है कि धन समाज के कमजोर वर्ग तक पहुँचना चाहिए।

उपयोगितावाद से भिन्नता

रॉल्स ने उपयोगितावाद (Utilitarianism) की आलोचना की।

उपयोगितावाद कहता है – अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख।

रॉल्स ने कहा यह गलत हो सकता है, क्योंकि इससे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अनदेखी हो सकती है।

उदाहरण:

यदि बहुसंख्यक शेयरधारकों को लाभ हो लेकिन अल्पसंख्यकों को नुकसान, तो उपयोगितावाद इसे स्वीकार कर सकता है।
लेकिन रॉल्स इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

भारतीय संविधान से संबंध

रॉल्स के विचार भारतीय संविधान से मेल खाते हैं:

अनुच्छेद 14 – कानून के समक्ष समानता

अनुच्छेद 21 – जीवन और स्वतंत्रता

अनुच्छेद 38 – सामाजिक न्याय

अनुच्छेद 39 – संसाधनों का समान वितरण

आलोचना

यह एक काल्पनिक सिद्धांत है।

वास्तविक जीवन अधिक जटिल है।

यह अधिक समानता पर जोर देता है।

फिर भी, यह आधुनिक न्यायशास्त्र में अत्यंत प्रभावशाली है।

निष्कर्ष

रॉल्स का न्याय सिद्धांत निष्पक्षता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि न्याय वही है जो सभी के लिए निष्पक्ष हो, विशेषकर कमजोर वर्ग के लिए।

उनके दो सिद्धांत — समान स्वतंत्रता और अंतर सिद्धांत — आधुनिक कानून की आधारशिला हैं।

कंपनी अधिनियम, 2013 में अल्पसंख्यक संरक्षण, CSR, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के प्रावधान रॉल्स के विचारों को दर्शाते हैं।

इस प्रकार, रॉल्स का न्याय सिद्धांत आधुनिक कॉर्पोरेट शासन और न्यायशास्त्र को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।