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Who was Savigny?

साविनी कौन थे?

फ्रेडरिक कार्ल वॉन साविनी (Friedrich Carl von Savigny) एक प्रसिद्ध जर्मन विधिवेत्ता और विधिशास्त्री थे। उनका जन्म 1779 में हुआ और उनका निधन 1861 में हुआ। वे ऐतिहासिक विधि शाला (Historical School of Jurisprudence) के संस्थापक माने जाते हैं। विधिशास्त्र के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

साविनी ने कानून को समझने का एक नया दृष्टिकोण दिया। उनके अनुसार कानून किसी शासक की केवल आज्ञा नहीं है और न ही यह केवल तर्क से उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि कानून समाज के रीति-रिवाजों, परंपराओं और ऐतिहासिक विकास से धीरे-धीरे विकसित होता है।

Volksgeist का सिद्धांत

साविनी का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “Volksgeist” है। इसका अर्थ है “जनता की आत्मा” या “जन-चेतना”। साविनी का मानना था कि प्रत्येक राष्ट्र की अपनी विशिष्ट संस्कृति और मानसिकता होती है। कानून उसी सामूहिक चेतना का प्रतिबिंब होता है।

इसका अर्थ है कि कानून को समझने के लिए उस समाज के इतिहास और परंपराओं को समझना आवश्यक है।

संहिताकरण का विरोध

साविनी ने अपने समय में जर्मनी में हो रहे कानून के त्वरित संहिताकरण (Codification) का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कानून को अचानक लिखित रूप में परिवर्तित नहीं करना चाहिए। यदि कानून समाज के ऐतिहासिक विकास से अलग होगा, तो वह प्रभावी नहीं होगा।

उनके अनुसार कानून का विकास एक पौधे की तरह होता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है और समाज के साथ विकसित होता है।

कानून के विकास के तीन चरण

साविनी ने कानून के विकास के तीन चरण बताए:

प्रथागत चरण – जब कानून परंपराओं और रीति-रिवाजों के रूप में होता है।

विद्वत चरण – जब विधिवेत्ता इन प्रथाओं का अध्ययन और व्यवस्थितकरण करते हैं।

संहिताबद्ध चरण – जब कानून को लिखित रूप में संहिताबद्ध किया जाता है।

कंपनी अधिनियम, 2013 से संबंध

कंपनी अधिनियम, 2013 अचानक अस्तित्व में नहीं आया। इससे पहले कंपनी अधिनियम, 1956 था। उससे पहले ब्रिटिश कानून लागू थे। यह स्पष्ट करता है कि कंपनी कानून भी ऐतिहासिक विकास का परिणाम है।

उदाहरण के लिए, पृथक कानूनी व्यक्तित्व (Separate Legal Personality) का सिद्धांत पहले न्यायालय के निर्णयों में विकसित हुआ और बाद में अधिनियम में शामिल किया गया।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सिद्धांत भी व्यापारिक परंपराओं से विकसित हुए।

साविनी का महत्व

ऐतिहासिक शाला के संस्थापक।

Volksgeist सिद्धांत के प्रतिपादक।

संहिताकरण के विरोधी।

कानून और संस्कृति के बीच संबंध स्थापित किया।

कानून को समाज के इतिहास से जोड़ा।

आलोचना

बहुत अधिक परंपरावादी।

तेजी से सुधार का विरोध।

पुरानी कुप्रथाओं को बचा सकता है।

सामाजिक क्रांति का समर्थन नहीं करता।

निष्कर्ष

साविनी एक महान विधिवेत्ता थे जिन्होंने यह सिद्ध किया कि कानून समाज की आत्मा और इतिहास से विकसित होता है। कंपनी कानून का विकास भी उनके सिद्धांत को दर्शाता है।