भारतीय संविधान के अंतर्गत मानव अधिकार वे मूल अधिकार हैं जो व्यक्ति को सम्मान, समानता और स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने के लिए आवश्यक होते हैं। ये अधिकार मुख्य रूप से भाग III (मौलिक अधिकार) में दिए गए हैं और भाग IV (राज्य के नीति निदेशक तत्व) द्वारा समर्थित हैं।
संविधान यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समानता मिले और उसके साथ भेदभाव न हो। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता देता है, जबकि अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को रोकता है। अनुच्छेद 19 भाषण, अभिव्यक्ति, आवागमन और संघ बनाने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 21 सबसे महत्वपूर्ण है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। न्यायालयों ने इसे विस्तारित कर इसमें निजता, स्वच्छ पर्यावरण, शिक्षा और जीविका के अधिकार भी शामिल किए हैं।
मानव अधिकारों की रक्षा के लिए उपाय भी दिए गए हैं। अनुच्छेद 32 के तहत व्यक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय रिट जारी कर सकते हैं। नीति निदेशक तत्व राज्य को सामाजिक और आर्थिक न्याय स्थापित करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।
इस प्रकार भारतीय संविधान मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।