Joginder Kumar v. State of U.P. (1994) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी सामान्य तरीके से नहीं की जानी चाहिए। पुलिस के पास गिरफ्तारी का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर मामले में गिरफ्तारी जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) को प्रभावित करती है, इसलिए इसे सोच-समझकर करना चाहिए। गिरफ्तारी तभी होनी चाहिए जब जांच के लिए जरूरी हो या अपराध रोकने के लिए आवश्यक हो।
कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण नियम दिए:
गिरफ्तार व्यक्ति को अपने रिश्तेदार या दोस्त को सूचना देने का अधिकार है
पुलिस को गिरफ्तारी का कारण बताना होगा
गिरफ्तारी मनमानी नहीं हो सकती
मजिस्ट्रेट को जांच करनी होगी कि गिरफ्तारी सही थी या नहीं
यह केस मानव अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
👉 आसान अर्थ:
पुलिस बिना कारण किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। गिरफ्तारी सही और जरूरी होनी चाहिए।