Volksgeist क्या है?
Volksgeist एक जर्मन शब्द है। इसका अर्थ है “जनता की आत्मा” या “लोगों की सामूहिक भावना।” यह सिद्धांत फ्रेडरिक कार्ल वॉन साविनी द्वारा दिया गया था। साविनी ऐतिहासिक विधि शाला के संस्थापक थे।
साविनी के अनुसार कानून किसी शासक की केवल आज्ञा नहीं है और न ही केवल तर्क से बनाया गया नियम है। कानून समाज के रीति-रिवाजों, परंपराओं, संस्कृति और ऐतिहासिक विकास से धीरे-धीरे उत्पन्न होता है। इसी सामूहिक भावना को Volksgeist कहा जाता है।
साविनी का मानना था कि हर देश और समाज की अपनी अलग पहचान होती है। लोगों की भाषा, धर्म, जीवन शैली, आर्थिक स्थिति और इतिहास मिलकर एक सामूहिक चेतना बनाते हैं। कानून उसी चेतना का प्रतिबिंब होता है।
इसका अर्थ है कि कानून को समझने के लिए समाज के इतिहास को समझना आवश्यक है। यदि किसी देश का कानून उसकी संस्कृति से मेल नहीं खाता, तो वह प्रभावी नहीं होगा।
संहिताकरण का विरोध
साविनी ने अपने समय में जर्मनी में कानून के त्वरित संहिताकरण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कानून को बिना ऐतिहासिक आधार के अचानक लिखित रूप में लागू नहीं करना चाहिए।
उनके अनुसार कानून एक जीवित प्रक्रिया है। यह समाज के साथ विकसित होता है। जैसे-जैसे समाज बदलता है, वैसे-वैसे कानून भी बदलता है।
कानून के तीन चरण
साविनी ने कानून के विकास के तीन चरण बताए:
प्रथागत चरण – जब लोग परंपराओं का पालन करते हैं और वही कानून बन जाता है।
विद्वत चरण – जब विधि विशेषज्ञ इन परंपराओं का अध्ययन करते हैं।
संहिताबद्ध चरण – जब कानून को लिखित रूप दिया जाता है।
Volksgeist विशेष रूप से पहले चरण में दिखाई देता है।
कंपनी अधिनियम, 2013 में महत्व
कंपनी अधिनियम, 2013 अचानक नहीं बना। यह पहले के अधिनियमों का विकसित रूप है। कंपनी अधिनियम, 1956 और ब्रिटिश कानूनों ने इसे प्रभावित किया।
कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) जैसे प्रावधान भारतीय समाज की अपेक्षाओं को दर्शाते हैं। यह दिखाता है कि कानून समाज की भावना को दर्शाता है।
पृथक कानूनी व्यक्तित्व का सिद्धांत पहले न्यायालयों द्वारा विकसित हुआ, बाद में अधिनियम में शामिल हुआ।
यह सब Volksgeist सिद्धांत को दर्शाता है।
Volksgeist का महत्व
कानून को समाज से जोड़ता है।
कानून के ऐतिहासिक विकास को समझाता है।
कृत्रिम कानून का विरोध करता है।
राष्ट्रीय पहचान को महत्व देता है।
क्रमिक सुधार का समर्थन करता है।
आलोचना
यह बहुत अधिक परंपरावादी है।
सुधार को धीमा कर सकता है।
जनता की आत्मा को परिभाषित करना कठिन है।
आधुनिक बदलावों को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
निष्कर्ष
Volksgeist का अर्थ है कि कानून जनता की आत्मा और ऐतिहासिक विकास से उत्पन्न होता है। कंपनी कानून भी इसी प्रकार धीरे-धीरे विकसित हुआ है।