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What are Legal and Moral rights?

विधिक अधिकार (Legal Rights) और नैतिक अधिकार (Moral Rights) क्या हैं?

अधिकार का अर्थ है वह वैध दावा जिसे कोई व्यक्ति समाज में करने का हक रखता है। अधिकार वह शक्ति है जिसके आधार पर कोई व्यक्ति किसी कार्य को करने या किसी लाभ को प्राप्त करने का दावा कर सकता है। लेकिन सभी अधिकार एक जैसे नहीं होते। कुछ अधिकार कानून द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं, जबकि कुछ अधिकार केवल नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर आधारित होते हैं। इसलिए अधिकारों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है:

विधिक अधिकार (Legal Rights)

नैतिक अधिकार (Moral Rights)

कंपनी कानून, विशेषकर कंपनी अधिनियम, 2013 के संदर्भ में यह अंतर समझना बहुत आवश्यक है, क्योंकि कंपनी के सदस्यों, निदेशकों और कर्मचारियों के अधिकारों का निर्धारण इसी आधार पर होता है।

विधिक अधिकार का अर्थ

विधिक अधिकार वह अधिकार है जिसे कानून मान्यता देता है और जिसकी रक्षा करता है। यदि इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो संबंधित व्यक्ति न्यायालय या ट्रिब्यूनल में जाकर न्याय प्राप्त कर सकता है।

सरल शब्दों में, विधिक अधिकार वह है जिसे अदालत लागू कर सकती है।

कंपनी अधिनियम, 2013 में अनेक विधिक अधिकार दिए गए हैं। उदाहरण:

धारा 47 – मतदान का अधिकार

धारा 101 – बैठक की सूचना पाने का अधिकार

धारा 123 – लाभांश प्राप्त करने का अधिकार (घोषणा के बाद)

धारा 88 – रजिस्टर का निरीक्षण करने का अधिकार

धारा 241 – उत्पीड़न के विरुद्ध आवेदन का अधिकार

धारा 245 – वर्ग वाद (Class Action) का अधिकार

ये सभी अधिकार विधिक अधिकार हैं क्योंकि:

ये अधिनियम में लिखे गए हैं

इनका उल्लंघन होने पर न्यायालय में जाया जा सकता है

ट्रिब्यूनल उपचार प्रदान कर सकता है

उदाहरण के लिए, यदि किसी शेयरधारक को मतदान से वंचित किया जाता है, तो वह एनसीएलटी में जा सकता है। इसका अर्थ है कि मतदान का अधिकार विधिक अधिकार है।

विधिक अधिकार की विशेषताएँ

विधिक अधिकार में तीन मुख्य तत्व होते हैं:

अधिकार धारक (Right Holder) – जिसे अधिकार प्राप्त है

कर्तव्य धारक (Duty Holder) – जिस पर कर्तव्य है

विधिक उपचार (Legal Remedy) – उल्लंघन होने पर उपाय

यदि कंपनी शेयरधारक को लाभांश नहीं देती जबकि लाभांश घोषित हो चुका है, तो यह विधिक अधिकार का उल्लंघन है।

नैतिक अधिकार का अर्थ

नैतिक अधिकार वह अधिकार है जो नैतिकता, सदाचार और सामाजिक मूल्यों पर आधारित होता है। इसे कानून मान्यता नहीं देता, बल्कि यह व्यक्ति की अंतरात्मा और समाज की नैतिक धारणाओं पर आधारित होता है।

नैतिक अधिकार अदालत में लागू नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे कानून द्वारा मान्यता न दी जाए।

उदाहरण:

कंपनी द्वारा कर्मचारियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना

अल्पसंख्यक शेयरधारकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त प्रयास

समाज के कल्याण के लिए दान देना

यदि कंपनी ऐसा नहीं करती, तो यह नैतिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन जब तक कोई विधिक प्रावधान न हो, तब तक अदालत में मुकदमा नहीं किया जा सकता।

नैतिक अधिकार और कंपनी प्रशासन

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166 में निदेशकों को “सद्भावना” (Good Faith) में कार्य करने का कर्तव्य दिया गया है। यह कर्तव्य विधिक भी है और नैतिक भी।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहले केवल नैतिक जिम्मेदारी थी। लेकिन अब धारा 135 के तहत यह आंशिक रूप से विधिक दायित्व बन गया है।

इससे स्पष्ट होता है कि कई बार नैतिक अधिकार समय के साथ विधिक अधिकार बन जाते हैं।

विधिक और नैतिक अधिकारों में अंतर
आधार विधिक अधिकार नैतिक अधिकार
स्रोत कानून नैतिकता
प्रवर्तन अदालत में लागू अदालत में लागू नहीं
निश्चितता स्पष्ट और निश्चित बदलते रहते हैं
उपचार विधिक उपचार उपलब्ध सामाजिक स्वीकृति या अस्वीकृति
विधिक और नैतिक अधिकारों का संबंध

विधिक अधिकार और नैतिक अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हैं। कई विधिक अधिकार पहले नैतिक विचार थे। समय के साथ जब समाज ने उन्हें आवश्यक समझा, तो उन्हें कानून में शामिल कर लिया गया।

लेकिन सभी नैतिक अधिकार विधिक अधिकार नहीं बनते।

कंपनी कानून में महत्व

कंपनी कानून में विधिक अधिकार शेयरधारकों की सुरक्षा करते हैं।

नैतिक अधिकार कंपनी की छवि और प्रतिष्ठा को मजबूत करते हैं।

यदि कंपनी केवल विधिक न्यूनतम मानकों का पालन करे और नैतिकता की अनदेखी करे, तो दीर्घकाल में उसका नुकसान हो सकता है।

इसलिए दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अदालत केवल विधिक अधिकार लागू करती है।

निष्कर्ष

विधिक अधिकार वे हैं जिन्हें कानून मान्यता देता है और जिन्हें न्यायालय लागू करता है।

नैतिक अधिकार वे हैं जो नैतिकता और सदाचार पर आधारित हैं और जिन्हें अदालत में लागू नहीं किया जा सकता।

कंपनी अधिनियम, 2013 में अधिकांश अधिकार विधिक अधिकार हैं।

नैतिक अधिकार कंपनी के सुशासन और नैतिक आचरण को दिशा देते हैं।