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Explain classification of rights.

अधिकारों का वर्गीकरण का अर्थ

अधिकार वह कानूनी दावा है जिसे कानून मान्यता देता है और जिसकी रक्षा करता है। लेकिन सभी अधिकार एक जैसे नहीं होते। कुछ अधिकार संविधान से मिलते हैं, कुछ अधिनियम से, कुछ अनुबंध से और कुछ विशेष परिस्थितियों में उत्पन्न होते हैं। इसलिए अधिकारों को अलग-अलग समूहों में बाँटना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया को अधिकारों का वर्गीकरण कहते हैं।

सरल शब्दों में, अधिकारों को उनकी प्रकृति, स्रोत, लागू होने की सीमा और प्रवर्तन की विधि के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बाँटना ही अधिकारों का वर्गीकरण है।

कंपनी कानून में यह वर्गीकरण बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह समझने में सहायता मिलती है कि कौन-सा अधिकार वैधानिक है, कौन-सा व्यक्तिगत है, कौन-सा संपत्ति से जुड़ा है और किस अधिकार के उल्लंघन पर कौन-सा उपाय उपलब्ध है।

1. विधिक अधिकार और नैतिक अधिकार

पहला वर्गीकरण है – विधिक अधिकार (Legal Rights) और नैतिक अधिकार (Moral Rights)।

विधिक अधिकार वे अधिकार हैं जिन्हें कानून मान्यता देता है और जिनका उल्लंघन होने पर न्यायालय या ट्रिब्यूनल में जाया जा सकता है।

नैतिक अधिकार वे अधिकार हैं जो नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर आधारित होते हैं, लेकिन उन्हें न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता।

कंपनी कानून में अधिकांश अधिकार विधिक अधिकार होते हैं, क्योंकि वे कंपनी अधिनियम, 2013 से उत्पन्न होते हैं।

उदाहरण:

धारा 47 के अंतर्गत शेयरधारक को मतदान का अधिकार है। यह विधिक अधिकार है।

यदि कोई निदेशक कर्मचारियों के कल्याण के लिए काम करे, तो यह नैतिक कर्तव्य हो सकता है, परंतु यह विधिक अधिकार नहीं है।

2. सार्वजनिक अधिकार और निजी अधिकार

सार्वजनिक अधिकार वे अधिकार हैं जो समाज के सभी लोगों को प्राप्त होते हैं।

निजी अधिकार वे अधिकार हैं जो किसी विशेष व्यक्ति या समूह को प्राप्त होते हैं।

कंपनी कानून में अधिकांश अधिकार निजी अधिकार होते हैं, क्योंकि वे किसी सदस्य या शेयरधारक को विशेष रूप से दिए जाते हैं।

उदाहरण:

धारा 101 के अंतर्गत बैठक की सूचना पाने का अधिकार – यह निजी अधिकार है।

3. मौलिक अधिकार और वैधानिक अधिकार

मौलिक अधिकार संविधान द्वारा दिए गए अधिकार हैं।

वैधानिक अधिकार वे हैं जो किसी विशेष अधिनियम द्वारा दिए जाते हैं।

कंपनी कानून में अधिकार मुख्य रूप से वैधानिक अधिकार होते हैं।

उदाहरण:

धारा 245 के अंतर्गत वर्ग वाद दायर करने का अधिकार – यह वैधानिक अधिकार है।

4. व्यक्तिगत अधिकार और संपत्ति संबंधी अधिकार

व्यक्तिगत अधिकार (Personal Rights) वे हैं जो किसी विशेष व्यक्ति से संबंधित होते हैं।

संपत्ति संबंधी अधिकार (Proprietary Rights) वे हैं जो किसी संपत्ति पर अधिकार देते हैं।

कंपनी कानून में:

मतदान का अधिकार – व्यक्तिगत अधिकार है।

लाभांश प्राप्त करने का अधिकार – संपत्ति संबंधी अधिकार है।

संपत्ति संबंधी अधिकार आमतौर पर हस्तांतरणीय होते हैं, जबकि व्यक्तिगत अधिकार सीमित हो सकते हैं।

5. अधिकार इन रेम और अधिकार इन पर्सोनम

अधिकार इन रेम (Right in Rem) – ऐसा अधिकार जो पूरे संसार के विरुद्ध लागू हो।

अधिकार इन पर्सोनम (Right in Personam) – ऐसा अधिकार जो किसी विशेष व्यक्ति के विरुद्ध लागू हो।

कंपनी कानून में अधिकांश अधिकार इन पर्सोनम होते हैं, क्योंकि वे कंपनी के विरुद्ध लागू होते हैं।

उदाहरण:

लाभांश का दावा कंपनी के विरुद्ध किया जाता है, इसलिए यह इन पर्सोनम अधिकार है।

6. प्राथमिक और द्वितीयक अधिकार

प्राथमिक अधिकार वह मूल अधिकार है।

द्वितीयक अधिकार वह है जो प्राथमिक अधिकार के उल्लंघन पर उत्पन्न होता है।

उदाहरण:

मतदान का अधिकार – प्राथमिक अधिकार है।

मतदान से वंचित होने पर एनसीएलटी में जाने का अधिकार – द्वितीयक अधिकार है।

7. निहित और सशर्त अधिकार

निहित अधिकार (Vested Right) वह है जो पूर्ण और निश्चित हो।

सशर्त अधिकार (Contingent Right) वह है जो किसी घटना पर निर्भर हो।

उदाहरण:

लाभांश घोषित होने के बाद उसका भुगतान पाने का अधिकार – निहित अधिकार है।

घोषणा से पहले लाभांश पाने की उम्मीद – सशर्त अधिकार है।

8. व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकार

व्यक्तिगत अधिकार एक सदस्य को प्राप्त होता है।

सामूहिक अधिकार कई सदस्यों को मिलकर प्रयोग करना होता है।

उदाहरण:

रजिस्टर का निरीक्षण – व्यक्तिगत अधिकार।

धारा 245 के अंतर्गत वर्ग वाद – सामूहिक अधिकार।

कंपनी कानून में वर्गीकरण का महत्व

अधिकारों का वर्गीकरण यह समझने में मदद करता है:

कौन-सा अधिकार वैधानिक है

कौन-सा अधिकार हस्तांतरणीय है

कौन-सा अधिकार समूह द्वारा प्रयोग किया जा सकता है

किस अधिकार के उल्लंघन पर कौन-सा उपाय उपलब्ध है

उदाहरण के लिए, वैधानिक अधिकारों को कंपनी के लेखों द्वारा हटाया नहीं जा सकता।

निष्कर्ष

अधिकारों का वर्गीकरण कानून की समझ को सरल बनाता है। कंपनी कानून में अधिकार विभिन्न प्रकार के होते हैं जैसे वैधानिक, व्यक्तिगत, संपत्ति संबंधी, निहित, सशर्त, सामूहिक आदि। इनका सही वर्गीकरण न्याय और उचित उपचार सुनिश्चित करता है।