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Define Duty.

कर्तव्य का अर्थ

“कर्तव्य” का अर्थ है वह कानूनी दायित्व जो कानून द्वारा किसी व्यक्ति पर डाला जाता है। सरल शब्दों में, कर्तव्य का मतलब है – “जो काम कानून के अनुसार आपको करना ही है” या “जो काम आपको नहीं करना चाहिए।”

यदि अधिकार लाभ है, तो कर्तव्य जिम्मेदारी है।
यदि किसी व्यक्ति को कोई अधिकार प्राप्त है, तो किसी दूसरे व्यक्ति पर कर्तव्य होता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी शेयरधारक को कंपनी की सामान्य सभा में मतदान करने का अधिकार है, तो कंपनी का कर्तव्य है कि वह उसे मतदान करने दे। यदि कंपनी उसे मतदान से रोकती है, तो यह कर्तव्य का उल्लंघन है।

इस प्रकार, कर्तव्य अधिकार का दूसरा पक्ष है।

कर्तव्य की विधिक परिभाषा

विभिन्न विधिवेत्ताओं ने कर्तव्य की परिभाषा दी है।

सालमंड के अनुसार:
“कर्तव्य वह कार्य या त्याग है जिसे कानून मान्यता देता है और जिसका उल्लंघन एक विधिक गलत है।”

ऑस्टिन के अनुसार:
“कर्तव्य वह स्थिति है जिसमें कानून का उल्लंघन करने पर दंड भुगतना पड़ता है।”

इन परिभाषाओं से स्पष्ट है:

कर्तव्य कानून द्वारा लगाया जाता है।

कर्तव्य का उल्लंघन दंडनीय है।

कर्तव्य सकारात्मक (कुछ करना) या नकारात्मक (कुछ न करना) हो सकता है।

अधिकार और कर्तव्य का संबंध

अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

यदि A के पास अधिकार है, तो B के ऊपर कर्तव्य है।

उदाहरण:

धारा 101 के अनुसार, सदस्य को बैठक की सूचना का अधिकार है।

कंपनी का कर्तव्य है कि वह सूचना भेजे।

इसलिए, अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

कर्तव्य के प्रकार

कर्तव्यों को निम्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

विधिक कर्तव्य – जो कानून द्वारा लागू होते हैं।

नैतिक कर्तव्य – जो नैतिकता पर आधारित हैं।

सार्वजनिक कर्तव्य – जो जनता के प्रति होते हैं।

निजी कर्तव्य – जो किसी विशेष व्यक्ति के प्रति होते हैं।

वैधानिक कर्तव्य – जो किसी अधिनियम द्वारा बनाए जाते हैं।

न्यासीय कर्तव्य (Fiduciary Duty) – जो विश्वास के आधार पर होते हैं।

कंपनी कानून में अधिकतर कर्तव्य वैधानिक और न्यासीय होते हैं।

कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत कर्तव्य

कंपनी अधिनियम, 2013 कई महत्वपूर्ण कर्तव्य निर्धारित करता है।

सबसे महत्वपूर्ण है:

धारा 166 – निदेशकों के कर्तव्य

इस धारा के अनुसार, निदेशक को:

कंपनी के लेखों (Articles) के अनुसार कार्य करना होगा।

सद्भावना (good faith) से कार्य करना होगा।

कंपनी के उद्देश्य को बढ़ावा देना होगा।

उचित सावधानी और कौशल से कार्य करना होगा।

हितों के टकराव से बचना होगा।

अनुचित लाभ प्राप्त नहीं करना होगा।

यदि निदेशक अनुचित लाभ प्राप्त करता है, तो उसे वह राशि कंपनी को लौटानी होगी।

कंपनी के कर्तव्य

कंपनी के भी कई कर्तव्य हैं:

धारा 88 – रजिस्टर बनाए रखना

धारा 92 – वार्षिक रिटर्न दाखिल करना

धारा 101 – बैठक की सूचना देना

धारा 123 – घोषित लाभांश का भुगतान करना

धारा 128 – लेखा पुस्तकों को बनाए रखना

धारा 134 – वित्तीय विवरण तैयार करना

यदि कंपनी इन कर्तव्यों का पालन नहीं करती, तो दंड लगाया जा सकता है।

न्यासीय कर्तव्य (Fiduciary Duty)

निदेशक कंपनी के प्रति विश्वास की स्थिति में होते हैं। इसे न्यासीय कर्तव्य कहते हैं।

इसका अर्थ है:

निदेशक कंपनी के हित में कार्य करें।

निजी लाभ के लिए पद का दुरुपयोग न करें।

कंपनी की संपत्ति का दुरुपयोग न करें।

यदि वे ऐसा करते हैं, तो यह कर्तव्य का उल्लंघन है।

कर्तव्य का उल्लंघन (Breach of Duty)

यदि कोई व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता, तो उसे कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं:

जुर्माना

क्षतिपूर्ति

पद से हटाया जाना

अयोग्यता

कारावास (धोखाधड़ी के मामलों में)

उदाहरण: यदि निदेशक धोखाधड़ी करते हैं, तो धारा 447 के तहत सजा हो सकती है।

कंपनी कानून में कर्तव्य का महत्व

कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति है। वह अपने निदेशकों के माध्यम से कार्य करती है। यदि निदेशक अपने कर्तव्य का पालन न करें, तो शेयरधारकों को हानि हो सकती है।

इसलिए कर्तव्य:

जवाबदेही सुनिश्चित करता है

पारदर्शिता बढ़ाता है

निवेशकों का विश्वास बनाए रखता है

कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करता है

निष्कर्ष

कर्तव्य वह कानूनी जिम्मेदारी है जो कानून द्वारा किसी व्यक्ति पर लगाई जाती है। कंपनी कानून में कर्तव्यों का विशेष महत्व है क्योंकि वे निदेशकों और कंपनी को नियंत्रित रखते हैं। यदि कर्तव्यों का पालन न हो, तो कंपनी का संचालन असंतुलित हो सकता है।

इस प्रकार, कर्तव्य कंपनी कानून की मूल आधारशिला है।