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Define Right.

अधिकार का अर्थ

“अधिकार” का अर्थ है ऐसा वैधानिक हित जिसे कानून मान्यता देता है और जिसकी रक्षा करता है। सरल शब्दों में, अधिकार वह चीज है जो कानून के अनुसार किसी व्यक्ति की होती है और जिसे वह कानूनी रूप से दावा कर सकता है।

अधिकार केवल इच्छा या उम्मीद नहीं है। यदि किसी बात को कानून ने मान्यता नहीं दी है, तो वह कानूनी अधिकार नहीं कहलाती। इसलिए अधिकार का आधार कानून है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई शेयरधारक किसी कंपनी की बैठक में वोट देने का अधिकार रखता है, तो यह अधिकार कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा दिया गया है। यदि कंपनी उसे वोट देने से रोकती है, तो वह एनसीएलटी (National Company Law Tribunal) में जा सकता है।

इससे स्पष्ट है कि अधिकार के तीन मुख्य भाग होते हैं:

वह व्यक्ति जिसके पास अधिकार है

वह व्यक्ति या संस्था जिस पर कर्तव्य है

कानून द्वारा संरक्षण

अधिकार की विधिक परिभाषा

विभिन्न विधि विशेषज्ञों ने अधिकार को अलग-अलग शब्दों में परिभाषित किया है।

सालमंड के अनुसार:
“अधिकार वह हित है जिसे कानून मान्यता देता है और संरक्षित करता है।”

ऑस्टिन के अनुसार:
“अधिकार वह शक्ति है जो कानून द्वारा दी जाती है।”

इन परिभाषाओं से स्पष्ट है कि बिना कानूनी मान्यता के कोई अधिकार नहीं होता।

यदि किसी अधिकार के उल्लंघन पर कोई उपाय (remedy) उपलब्ध नहीं है, तो वह अधिकार व्यर्थ है।

अधिकार के आवश्यक तत्व

किसी भी कानूनी अधिकार के पाँच तत्व होते हैं:

अधिकारधारी व्यक्ति (Person of inherence)

कर्तव्यधारी व्यक्ति (Person of incidence)

विषयवस्तु (Content)

वस्तु (Object)

वैधानिक आधार (Title)

उदाहरण:

यदि कोई शेयरधारक लाभांश पाने का अधिकार रखता है:

शेयरधारक = अधिकारधारी

कंपनी = कर्तव्यधारी

लाभांश का भुगतान = विषयवस्तु

धनराशि = वस्तु

कंपनी अधिनियम = वैधानिक आधार

अधिकार और कर्तव्य का संबंध

हर अधिकार के साथ एक कर्तव्य जुड़ा होता है।

यदि A के पास अधिकार है, तो B के ऊपर कर्तव्य है।

उदाहरण:
शेयरधारक के पास वोट देने का अधिकार है।
कंपनी का कर्तव्य है कि उसे वोट देने दे।

अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

अधिकार के प्रकार

अधिकारों को कई प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

विधिक अधिकार (Legal Rights)

नैतिक अधिकार (Moral Rights)

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

वैधानिक अधिकार (Statutory Rights)

सार्वजनिक अधिकार (Public Rights)

निजी अधिकार (Private Rights)

कंपनी कानून में मुख्य रूप से वैधानिक अधिकार होते हैं, जो कंपनी अधिनियम, 2013 से उत्पन्न होते हैं।

कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत अधिकार

कंपनी अधिनियम, 2013 शेयरधारकों और सदस्यों को कई अधिकार देता है, जैसे:

धारा 47 – मतदान का अधिकार

धारा 101 – बैठक की सूचना पाने का अधिकार

धारा 94 – दस्तावेज देखने का अधिकार

धारा 123 – लाभांश प्राप्त करने का अधिकार

धारा 241 – उत्पीड़न और कुप्रबंधन के विरुद्ध आवेदन करने का अधिकार

धारा 245 – वर्ग वाद (Class Action) का अधिकार

ये सभी अधिकार कानून द्वारा संरक्षित हैं।

कंपनी कानून में अधिकार का महत्व

कंपनी में बहुमत का शासन होता है। लेकिन यदि अल्पसंख्यक शेयरधारकों के अधिकार सुरक्षित न हों, तो बहुमत उनका शोषण कर सकता है।

इसलिए कंपनी अधिनियम अधिकारों की व्यवस्था करता है ताकि:

पारदर्शिता बनी रहे

जवाबदेही बनी रहे

अल्पसंख्यक की रक्षा हो

कॉर्पोरेट गवर्नेंस मजबूत हो

अधिकार और उपचार (Remedy)

एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है:

“जहाँ अधिकार है, वहाँ उपचार है।”

यदि अधिकार का उल्लंघन होता है, तो कानून उपचार देता है।

कंपनी कानून में उपचार मिलते हैं:

एनसीएलटी

एनसीएलएटी

उच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय

निष्कर्ष

अधिकार वह कानूनी दावा है जिसे कानून मान्यता देता है और जिसकी रक्षा करता है। यह व्यक्ति को शक्ति देता है कि वह अपने हितों की रक्षा कर सके। कंपनी कानून में अधिकारों का विशेष महत्व है क्योंकि वे शेयरधारकों की सुरक्षा करते हैं और कंपनी प्रबंधन को नियंत्रित रखते हैं।

इस प्रकार, अधिकार विधि व्यवस्था की आधारशिला है।