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Define Legal Person.

कानून में विधिक व्यक्ति (Legal Person) उस इकाई को कहा जाता है जिसे कानून इस योग्य मानता है कि उसके अधिकार (rights) और कर्तव्य (duties) हो सकते हैं। एक विधिक व्यक्ति संपत्ति का स्वामी बन सकता है, अनुबंध कर सकता है, अदालत में मुकदमा कर सकता है और उसके विरुद्ध मुकदमा भी किया जा सकता है।

सामान्य भाषा में “व्यक्ति” शब्द का अर्थ मानव से लगाया जाता है, लेकिन कानून में इसका अर्थ अधिक व्यापक होता है। कानून केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि कुछ संस्थाओं और संगठनों को भी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है। इन्हें कृत्रिम व्यक्ति (Artificial Person) या विधिक व्यक्ति (Legal Person) कहा जाता है।

उदाहरण के लिए Companies Act, 2013 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनी को विधिक व्यक्ति माना जाता है। कंपनी का कोई भौतिक शरीर नहीं होता, लेकिन कानून उसे एक अलग पहचान देता है। इसी पहचान के कारण कंपनी संपत्ति रख सकती है, बैंक खाता खोल सकती है, अनुबंध कर सकती है और व्यापार कर सकती है।

इस प्रकार, विधिक व्यक्ति वह इकाई है जिसे कानून अधिकार और कर्तव्यों का धारक मानता है।

प्राकृतिक व्यक्ति और विधिक व्यक्ति

कानूनी सिद्धांत में व्यक्तियों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

प्राकृतिक व्यक्ति

विधिक या कृत्रिम व्यक्ति

प्राकृतिक व्यक्ति वह है जो मानव होता है। प्रत्येक मानव जन्म से ही विधिक व्यक्ति बन जाता है और मृत्यु तक विधिक व्यक्ति रहता है।

विधिक व्यक्ति वह इकाई है जो मानव नहीं होती, लेकिन कानून उसे व्यक्ति की तरह अधिकार और कर्तव्य रखने की अनुमति देता है।

विधिक व्यक्तियों के उदाहरण हैं:

• कंपनियाँ
• निगम (Corporations)
• सरकारी संस्थाएँ
• नगर निगम
• विश्वविद्यालय
• पंजीकृत संस्थाएँ

इनमें कंपनी कानून में सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण कंपनी है।

कंपनी कानून में विधिक व्यक्ति

Companies Act, 2013 के अंतर्गत जब कोई कंपनी पंजीकृत होती है, तब वह एक विधिक व्यक्ति बन जाती है।

पंजीकरण के बाद कंपनी अपने शेयरधारकों और निदेशकों से अलग एक स्वतंत्र विधिक इकाई (Separate Legal Entity) बन जाती है।

यह सिद्धांत प्रसिद्ध मामले Salomon v. Salomon & Co. Ltd. (1897) में स्थापित हुआ था।

इस मामले में न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण के बाद कंपनी अपने सदस्यों से अलग एक व्यक्ति बन जाती है, चाहे अधिकांश शेयर एक ही व्यक्ति के पास क्यों न हों।

इस सिद्धांत के कारण कंपनी:

• अपने नाम से संपत्ति रख सकती है
• मुकदमा कर सकती है
• उसके खिलाफ मुकदमा किया जा सकता है
• अनुबंध कर सकती है
• सदस्यों के बदलने पर भी अस्तित्व बनाए रखती है

कंपनी की विधिक पहचान का महत्व

कंपनी की विधिक पहचान आधुनिक व्यापार में बहुत महत्वपूर्ण है।

संपत्ति का स्वामित्व

कंपनी की संपत्ति कंपनी की होती है, न कि उसके शेयरधारकों की।

मुकदमा करने की क्षमता

कंपनी अदालत में मुकदमा कर सकती है और उसके खिलाफ मुकदमा किया जा सकता है।

सीमित दायित्व

शेयरधारकों की जिम्मेदारी केवल उनके शेयर के मूल्य तक सीमित रहती है।

सतत उत्तराधिकार

कंपनी सदस्यों के बदलने पर भी जारी रहती है।

विधिक व्यक्ति की विशेषताएँ

• अलग विधिक पहचान
• संपत्ति रखने की क्षमता
• अनुबंध करने की क्षमता
• अधिकार और कर्तव्य
• मुकदमा करने की क्षमता

निष्कर्ष

विधिक व्यक्ति का सिद्धांत कंपनी कानून का आधार है। यह सिद्धांत कंपनियों को उनके सदस्यों से अलग पहचान देता है और आधुनिक व्यापार प्रणाली को मजबूत बनाता है।