परिचय
कानून में व्यक्ति (Person) की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकार और कर्तव्य व्यक्तियों के संदर्भ में ही अस्तित्व में होते हैं। कानून व्यक्तियों को मान्यता देता है ताकि वे कानूनी संबंधों में भाग ले सकें।
कानून केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि कुछ संगठनों को भी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।
इस आधार पर कानून दो प्रकार के व्यक्तियों को मान्यता देता है:
प्राकृतिक व्यक्ति
कृत्रिम या विधिक व्यक्ति
यह अंतर विशेष रूप से कंपनी कानून में महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी को एक कृत्रिम व्यक्ति माना जाता है।
प्राकृतिक व्यक्ति का अर्थ
प्राकृतिक व्यक्ति वह होता है जो मानव होता है। प्रत्येक मनुष्य जन्म से ही विधिक व्यक्ति बन जाता है और मृत्यु तक विधिक व्यक्ति बना रहता है।
प्राकृतिक व्यक्ति:
• संपत्ति रख सकता है
• अनुबंध कर सकता है
• मुकदमा कर सकता है
• अधिकारों का प्रयोग कर सकता है
प्राकृतिक व्यक्ति के पास भौतिक शरीर और स्वाभाविक बुद्धि होती है।
उदाहरण:
• नागरिक
• कर्मचारी
• व्यापारी
• शेयरधारक
कृत्रिम व्यक्ति का अर्थ
कृत्रिम व्यक्ति वह इकाई है जो मानव नहीं होती लेकिन कानून उसे अधिकार और कर्तव्य रखने की अनुमति देता है।
इसे विधिक व्यक्ति या जूरिस्टिक व्यक्ति भी कहा जाता है।
उदाहरण:
• कंपनियाँ
• निगम
• नगर निगम
• विश्वविद्यालय
• पंजीकृत संस्थाएँ
इनमें कंपनी कानून में सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण कंपनी है।
कंपनी कानून में कृत्रिम व्यक्ति
Companies Act, 2013 के अंतर्गत जब कोई कंपनी पंजीकृत होती है तब वह एक स्वतंत्र विधिक इकाई बन जाती है।
पंजीकरण के बाद कंपनी:
• संपत्ति रख सकती है
• अनुबंध कर सकती है
• मुकदमा कर सकती है
• व्यापार कर सकती है
इस सिद्धांत को कॉर्पोरेट व्यक्तित्व कहा जाता है।
Salomon v. Salomon (1897)
इस प्रसिद्ध मामले में न्यायालय ने कहा कि कंपनी अपने सदस्यों से अलग एक स्वतंत्र विधिक व्यक्ति है।
इसलिए कंपनी के ऋण के लिए कंपनी स्वयं जिम्मेदार होती है।
प्राकृतिक और कृत्रिम व्यक्ति में अंतर
उत्पत्ति
प्राकृतिक व्यक्ति जन्म से अस्तित्व में आता है।
कृत्रिम व्यक्ति कानून द्वारा बनाया जाता है।
भौतिक अस्तित्व
प्राकृतिक व्यक्ति का भौतिक शरीर होता है।
कृत्रिम व्यक्ति का भौतिक अस्तित्व नहीं होता।
कार्य करने की क्षमता
प्राकृतिक व्यक्ति स्वयं कार्य कर सकता है।
कृत्रिम व्यक्ति मानव एजेंटों के माध्यम से कार्य करता है।
अस्तित्व की अवधि
प्राकृतिक व्यक्ति की आयु सीमित होती है।
कृत्रिम व्यक्ति का अस्तित्व लंबे समय तक जारी रह सकता है।
निष्कर्ष
प्राकृतिक और कृत्रिम व्यक्ति कानून में दो महत्वपूर्ण श्रेणियाँ हैं। प्राकृतिक व्यक्ति मानव होता है जबकि कृत्रिम व्यक्ति कानून द्वारा निर्मित संस्था होती है।
कंपनी कानून में कृत्रिम व्यक्ति का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण कंपनी है।