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What is Corporate Personality?

परिचय

आधुनिक कंपनी कानून में सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक है कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी (Corporate Personality)।

इस अवधारणा के अनुसार कंपनी को कानून की दृष्टि में एक अलग कानूनी व्यक्ति माना जाता है।

हालाँकि कंपनी मनुष्यों द्वारा बनाई जाती है और उसके कार्य निदेशकों और शेयरधारकों द्वारा किए जाते हैं, फिर भी कानून कंपनी को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता देता है।

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ है कि जब कोई कंपनी Companies Act, 2013 के अंतर्गत पंजीकृत होती है, तो वह अपने सदस्यों से अलग एक कानूनी व्यक्ति बन जाती है।

इसका अर्थ है कि कंपनी:

संपत्ति रख सकती है

अनुबंध कर सकती है

व्यापार कर सकती है

मुकदमा कर सकती है

उस पर मुकदमा किया जा सकता है

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी कंपनी कानून का आधार है क्योंकि इसके बिना आधुनिक व्यवसायिक संगठन प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकते।

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ है कि कानून कंपनी को एक अलग कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।

कंपनी कोई मानव नहीं होती। उसका कोई भौतिक शरीर नहीं होता और वह स्वयं सोच नहीं सकती।

फिर भी कानून कंपनी को एक व्यक्ति की तरह मानता है ताकि वह कानूनी अधिकार और कर्तव्य निभा सके।

इसका अर्थ है कि कंपनी:

अपने नाम से संपत्ति रख सकती है

अनुबंध कर सकती है

बैंक से ऋण ले सकती है

व्यापार कर सकती है

न्यायालय में मुकदमा कर सकती है

इस प्रकार कंपनी की अपनी अलग कानूनी पहचान होती है।

Companies Act, 2013 के अंतर्गत कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी

जब कंपनी का पंजीकरण Companies Act, 2013 के अंतर्गत होता है, तब उसे Certificate of Incorporation मिलता है।

इस प्रमाण पत्र के जारी होने के बाद कंपनी एक Body Corporate बन जाती है।

Body Corporate का अर्थ है कि कंपनी की अपनी कानूनी पहचान होती है जो उसके सदस्यों से अलग होती है।

अलग कानूनी इकाई

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है Separate Legal Entity।

इसका अर्थ है कि कंपनी अपने शेयरधारकों से अलग होती है।

कंपनी के अधिकार और दायित्व उसके सदस्यों से अलग होते हैं।

उदाहरण के लिए यदि कंपनी बैंक से ऋण लेती है तो ऋण कंपनी का होता है, शेयरधारकों का नहीं।

कंपनी की संपत्ति

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ यह भी है कि कंपनी अपनी संपत्ति स्वयं रख सकती है।

यदि कंपनी कोई जमीन या भवन खरीदती है तो वह संपत्ति कंपनी की होती है, शेयरधारकों की व्यक्तिगत नहीं।

स्थायी उत्तराधिकार

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का एक महत्वपूर्ण लाभ है Perpetual Succession।

इसका अर्थ है कि कंपनी का अस्तित्व लगातार बना रहता है।

यदि शेयरधारक बदल जाएँ या उनकी मृत्यु हो जाए, तब भी कंपनी बनी रहती है।

सीमित देयता

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी से Limited Liability का सिद्धांत भी जुड़ा है।

इसका अर्थ है कि शेयरधारकों की जिम्मेदारी केवल उनके निवेश तक सीमित होती है।

उनकी व्यक्तिगत संपत्ति कंपनी के कर्ज के लिए उपयोग नहीं की जाती।

निष्कर्ष

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी कंपनी कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है।

इसका अर्थ है कि कंपनी अपने सदस्यों से अलग एक स्वतंत्र कानूनी व्यक्ति होती है।

यह सिद्धांत कंपनियों को संपत्ति रखने, व्यापार करने और अनुबंध करने की अनुमति देता है।

इसी कारण आधुनिक व्यवसायिक संगठन प्रभावी रूप से कार्य कर पाते हैं।