Skip to Content

Explain Fiction Theory.

परिचय

कंपनी कानून और न्यायशास्त्र में कई सिद्धांत हैं जो यह बताते हैं कि कंपनियों को कानून में किस प्रकार व्यक्ति माना जाता है। इन सिद्धांतों में से एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है फिक्शन थ्योरी (Fiction Theory)।

कंपनी का कोई भौतिक शरीर या प्राकृतिक अस्तित्व नहीं होता। फिर भी कानून कंपनी को एक कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।

इस स्थिति को समझाने के लिए फिक्शन थ्योरी का उपयोग किया जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी की कानूनी पहचान वास्तविक नहीं बल्कि कानून द्वारा बनाई गई कल्पना (fiction) है।

अर्थात कानून यह मान लेता है कि कंपनी एक व्यक्ति है ताकि वह कानूनी कार्य कर सके।

फिक्शन थ्योरी का अर्थ

फिक्शन थ्योरी के अनुसार कंपनी वास्तविक व्यक्ति नहीं होती।

यह केवल कानून द्वारा बनाई गई एक काल्पनिक इकाई है।

कंपनी का अस्तित्व केवल इसलिए होता है क्योंकि कानून उसे मान्यता देता है।

यदि कानून यह मान्यता न दे तो कंपनी एक अलग कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व में नहीं रहेगी।

इस प्रकार कंपनी की कानूनी पहचान कृत्रिम और काल्पनिक होती है।

फिक्शन थ्योरी का उद्भव

फिक्शन थ्योरी का विकास प्रसिद्ध जर्मन विधिवेत्ता साविनी (Savigny) ने किया था।

साविनी के अनुसार वास्तविक व्यक्ति केवल मनुष्य ही होते हैं क्योंकि उनमें बुद्धि और इच्छा होती है।

कंपनियाँ वास्तविक व्यक्ति नहीं हो सकतीं क्योंकि उनका प्राकृतिक अस्तित्व नहीं होता।

इसलिए कानून कंपनियों के लिए एक काल्पनिक व्यक्तित्व बनाता है।

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी से संबंध

फिक्शन थ्योरी का संबंध कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी से है।

कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी का अर्थ है कि कंपनी को कानून में व्यक्ति माना जाता है।

फिक्शन थ्योरी के अनुसार यह व्यक्तित्व वास्तविक नहीं बल्कि कानून की कल्पना है।

कंपनी स्वयं कार्य नहीं कर सकती। वह अपने निदेशकों और कर्मचारियों के माध्यम से कार्य करती है।

Companies Act, 2013 के अंतर्गत

भारत में Companies Act, 2013 कंपनियों को कृत्रिम कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।

जब कंपनी पंजीकृत होती है तो उसे Certificate of Incorporation मिलता है।

उसके बाद कंपनी एक Body Corporate बन जाती है।

यह सिद्धांत फिक्शन थ्योरी की अवधारणा को दर्शाता है।

विशेषताएँ

फिक्शन थ्योरी की मुख्य विशेषताएँ हैं:

• कंपनी का व्यक्तित्व कृत्रिम होता है
• यह कानून द्वारा बनाया जाता है
• कंपनी अपने निदेशकों के माध्यम से कार्य करती है
• यह सिद्धांत व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाता है

महत्व

फिक्शन थ्योरी कंपनी कानून में बहुत महत्वपूर्ण है।

यह बताती है कि कंपनियों को कानूनी व्यक्ति क्यों माना जाता है।

यह कंपनियों को संपत्ति रखने, व्यापार करने और अनुबंध करने की अनुमति देती है।

निष्कर्ष

फिक्शन थ्योरी के अनुसार कंपनी का व्यक्तित्व वास्तविक नहीं बल्कि कानून द्वारा बनाया गया है।

कंपनी को एक कृत्रिम कानूनी व्यक्ति माना जाता है ताकि वह व्यापार और कानूनी गतिविधियाँ कर सके।

इस प्रकार फिक्शन थ्योरी कंपनी कानून में कॉर्पोरेट पर्सनैलिटी को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।