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Discuss various theories of corporate personality.

परिचय

कॉर्पोरेट व्यक्तित्व कंपनी कानून का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि कंपनी को उसके सदस्यों से अलग एक स्वतंत्र कानूनी व्यक्ति माना जाता है।

कंपनी प्राकृतिक व्यक्ति नहीं होती बल्कि एक कृत्रिम व्यक्ति होती है जिसे कानून द्वारा बनाया जाता है।

कानून कंपनी को एक अलग कानूनी इकाई के रूप में मान्यता देता है।

कंपनी:

• संपत्ति रख सकती है
• अनुबंध कर सकती है
• मुकदमा कर सकती है
• उस पर मुकदमा किया जा सकता है

कॉर्पोरेट व्यक्तित्व की प्रकृति को समझाने के लिए कई सिद्धांत विकसित किए गए।

इन सिद्धांतों को कॉर्पोरेट व्यक्तित्व के सिद्धांत कहा जाता है।

मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं:

फिक्शन थ्योरी

कन्सेशन थ्योरी

रियलिस्ट थ्योरी

ब्रैकेट थ्योरी

पर्पस थ्योरी

कॉर्पोरेट व्यक्तित्व का अर्थ

कॉर्पोरेट व्यक्तित्व का अर्थ है कि कंपनी को उसके सदस्यों से अलग एक कानूनी पहचान प्राप्त होती है।

जब कंपनी का गठन Companies Act, 2013 के अंतर्गत होता है, तब वह एक Body Corporate बन जाती है।

कंपनी अपने नाम से संपत्ति रख सकती है और अनुबंध कर सकती है।

कंपनी के सदस्य बदलने पर भी कंपनी का अस्तित्व बना रहता है।

इसे स्थायी उत्तराधिकार (Perpetual Succession) कहा जाता है।

1. फिक्शन थ्योरी

फिक्शन थ्योरी कॉर्पोरेट व्यक्तित्व की सबसे प्रारंभिक व्याख्याओं में से एक है।

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी वास्तविक व्यक्ति नहीं है।

यह केवल कानून द्वारा बनाई गई काल्पनिक इकाई (Legal Fiction) है।

इस सिद्धांत के प्रमुख समर्थक Savigny थे।

उनके अनुसार केवल मनुष्य ही वास्तविक व्यक्ति होते हैं। कंपनी का व्यक्तित्व केवल कानून की कल्पना है।

2. कन्सेशन थ्योरी

कन्सेशन थ्योरी के अनुसार कंपनी का अस्तित्व राज्य की अनुमति से होता है।

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी राज्य की देन (Creature of the State) होती है।

प्राचीन समय में कंपनियाँ केवल सरकार की अनुमति से बनाई जाती थीं।

आज भी कंपनियों का गठन Companies Act, 2013 के अंतर्गत पंजीकरण के बाद ही संभव है।

3. रियलिस्ट थ्योरी

रियलिस्ट थ्योरी को ऑर्गेनिक थ्योरी भी कहा जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी एक वास्तविक सामाजिक संस्था है।

यह केवल कानूनी कल्पना नहीं बल्कि वास्तविक समूह है।

इस सिद्धांत के प्रमुख समर्थक Otto von Gierke थे।

4. ब्रैकेट थ्योरी

ब्रैकेट थ्योरी को Symbolist Theory भी कहा जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार कंपनी का व्यक्तित्व केवल एक प्रतीक है जो कंपनी के सदस्यों के समूह को दर्शाता है।

यह सिद्धांत बताता है कि कंपनी वास्तव में अपने सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है।

5. पर्पस थ्योरी

पर्पस थ्योरी के अनुसार कंपनी का व्यक्तित्व केवल एक विशेष उद्देश्य को पूरा करने के लिए होता है।

कंपनी को कानूनी व्यक्ति इसलिए माना जाता है ताकि वह अपने कानूनी कार्य कर सके।

कंपनी कानून में मान्यता

Companies Act, 2013 कॉर्पोरेट व्यक्तित्व को मान्यता देता है।

धारा 9 के अनुसार पंजीकरण के बाद कंपनी Body Corporate बन जाती है।

प्रसिद्ध मामला Salomon v. Salomon & Co Ltd (1897) इस सिद्धांत को स्थापित करता है।

निष्कर्ष

कॉर्पोरेट व्यक्तित्व के विभिन्न सिद्धांत कंपनी के कानूनी स्वरूप को समझाने का प्रयास करते हैं।

हालांकि सभी सिद्धांत अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, लेकिन आधुनिक कंपनी कानून कंपनी को एक अलग कानूनी इकाई के रूप में स्वीकार करता है।