परिचय
कानून में जूरिस्टिक पर्सन (Juristic Person) की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है।
जूरिस्टिक पर्सन वह इकाई होती है जिसे कानून अधिकार और कर्तव्य रखने की क्षमता देता है।
ऐसा व्यक्ति जरूरी नहीं कि मानव ही हो।
कानून कई गैर-मानव इकाइयों को भी व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।
मानव को प्राकृतिक व्यक्ति (Natural Person) कहा जाता है।
लेकिन कई ऐसी संस्थाएँ हैं जिन्हें कानूनी कार्य करने के लिए अधिकार चाहिए।
इसलिए कानून उन्हें जूरिस्टिक पर्सन के रूप में मान्यता देता है।
उदाहरण के लिए:
• कंपनियाँ
• निगम
• विश्वविद्यालय
• ट्रस्ट
• मंदिर की मूर्ति
इन सभी को कानून कुछ परिस्थितियों में जूरिस्टिक पर्सन मानता है।
जूरिस्टिक पर्सन का अर्थ
जूरिस्टिक पर्सन वह कृत्रिम व्यक्ति है जिसे कानून बनाता है।
इसका कोई भौतिक शरीर या मन नहीं होता, लेकिन कानून इसे व्यक्ति के रूप में मान्यता देता है।
इससे यह इकाई अधिकार और कर्तव्य रख सकती है।
यह अवधारणा आधुनिक कानून में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बिना कई संस्थाएँ सही तरीके से काम नहीं कर सकतीं।
कंपनी कानून में जूरिस्टिक पर्सन
कंपनी कानून में कंपनी को जूरिस्टिक पर्सन माना जाता है।
Companies Act, 2013 के अनुसार कंपनी पंजीकरण के बाद Body Corporate बन जाती है।
इसका अर्थ है कि कंपनी अपने सदस्यों से अलग एक स्वतंत्र कानूनी इकाई बन जाती है।
इस सिद्धांत को Salomon v. Salomon & Co Ltd (1897) मामले में स्थापित किया गया।
न्यायालय ने कहा कि कंपनी अपने शेयरधारकों से अलग कानूनी व्यक्ति है।
जूरिस्टिक पर्सन की विशेषताएँ
जूरिस्टिक पर्सन की कुछ मुख्य विशेषताएँ होती हैं।
पहली, इसकी अलग कानूनी पहचान होती है।
दूसरी, यह अपने नाम से संपत्ति रख सकता है।
तीसरी, यह अनुबंध कर सकता है।
चौथी, यह मुकदमा कर सकता है और उस पर मुकदमा किया जा सकता है।
पाँचवीं, इसमें Perpetual Succession होती है, यानी सदस्य बदलने पर भी यह संस्था बनी रहती है।
जूरिस्टिक पर्सन के उदाहरण
कानून में कई प्रकार की इकाइयों को जूरिस्टिक पर्सन माना जाता है।
कंपनी
कंपनी जूरिस्टिक पर्सन का सबसे सामान्य उदाहरण है।
निगम
सरकारी निगम भी जूरिस्टिक पर्सन होते हैं।
विश्वविद्यालय
कई विश्वविद्यालयों को भी कानूनी व्यक्ति माना जाता है।
धार्मिक मूर्ति
भारतीय कानून में मंदिर की मूर्ति को भी जूरिस्टिक पर्सन माना जाता है।
ट्रस्ट और सोसायटी
चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसायटी भी जूरिस्टिक पर्सन हो सकते हैं।
महत्व
जूरिस्टिक पर्सन की अवधारणा आधुनिक कानून में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह संगठनों को उनके सदस्यों से अलग स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति देती है।
यह व्यापार और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देती है।
निष्कर्ष
जूरिस्टिक पर्सन वह इकाई है जिसे कानून अधिकार और कर्तव्य रखने की क्षमता देता है।
कंपनियाँ, संस्थाएँ और धार्मिक संस्थाएँ इसके उदाहरण हैं।
यह अवधारणा आधुनिक कंपनी कानून का आधार है।