नाज़ फाउंडेशन बनाम दिल्ली सरकार (2009) मामला समानता और मानव गरिमा से संबंधित एक ऐतिहासिक निर्णय था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है।
न्यायालय ने कहा कि यौन अभिविन्यास के आधार पर भेदभाव असंवैधानिक है।
यह निर्णय समानता और मानव गरिमा के संवैधानिक सिद्धांत को मजबूत करता है।