मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) भारतीय संवैधानिक कानून का एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल संरचना सिद्धांत को और मजबूत किया।
मामले की पृष्ठभूमि
आपातकाल के दौरान सरकार ने 42वाँ संविधान संशोधन (1976) पारित किया।
इस संशोधन का उद्देश्य संसद की शक्ति बढ़ाना और न्यायपालिका की शक्ति कम करना था।
न्यायालय का निर्णय
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद की संशोधन शक्ति सीमित है।
यदि संसद असीमित संशोधन शक्ति प्राप्त कर ले तो यह संविधान की मूल संरचना को नष्ट कर सकता है।
महत्व
इस निर्णय ने न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) को मजबूत किया।
न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्व दोनों महत्वपूर्ण हैं।