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Explain rights of LGBTQ community.

LGBTQ समुदाय के अधिकार मानव अधिकारों का हिस्सा हैं क्योंकि हर व्यक्ति को सम्मान, पहचान और समानता के साथ जीवन जीने का अधिकार है। भारतीय संविधान लिंग या यौन अभिविन्यास के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता।

सबसे महत्वपूर्ण निर्णय Navtej Singh Johar बनाम भारत संघ (2018) में आया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 377 को असंवैधानिक घोषित कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया। न्यायालय ने कहा कि यौन अभिविन्यास व्यक्ति की पहचान का हिस्सा है और इसे अनुच्छेद 21 और 14 के तहत संरक्षण प्राप्त है।

इसके अलावा NALSA बनाम भारत संघ (2014) में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को “तीसरे लिंग” के रूप में मान्यता दी गई। Transgender Persons Act, 2019 शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य में भेदभाव से सुरक्षा देता है।

LGBTQ व्यक्तियों को निजता, सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है।

इस प्रकार LGBTQ अधिकार मानव अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।